जरुरी जानकारी | रुपये में कमजोरी से अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट आने के बीच खाद्य तेलों की खरीद लागत बढ़ने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को अधिकांश तेल-तिलहन (मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल या सीपीओ एवं पामोलीन तेल और बिनौला तेल) में सुधार देखने को मिला। सहकारी संस्था नेफेड द्वारा खरीदे गये सोयाबीन की बिकवाली करने की पहल से जहां सोयाबीन तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं सामान्य कारोबार के बीच सरसों तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए।
नयी दिल्ली, 25 फरवरी डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट आने के बीच खाद्य तेलों की खरीद लागत बढ़ने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को अधिकांश तेल-तिलहन (मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल या सीपीओ एवं पामोलीन तेल और बिनौला तेल) में सुधार देखने को मिला। सहकारी संस्था नेफेड द्वारा खरीदे गये सोयाबीन की बिकवाली करने की पहल से जहां सोयाबीन तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं सामान्य कारोबार के बीच सरसों तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए।
मलेशिया एक्सचेंज और शिकॉगो एक्सचेंज में मजबूती जारी है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि प्रमुख तेल संगठन ‘सोपा’ के अध्यक्ष डॉ. देवेश जैन ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर उनसे नेफेड द्वारा तीन मार्च, 2025 से, किसानों से खरीदे गये सोयाबीन की बिकवाली की पहल को रोकने की गुजारिश की है और मांग की है कि आगामी सोयाबीन बिजाई के बाद यानी जुलाई महीने में बिजाई पूरी होने के बाद ही ऐसी कोई बिकवाली होना चाहिये। आगामी बिजाई के मौसम से पहले नेफेड यदि बिकवाली करता है, तो इससे आगामी बिजाई प्रभावित होने का खतरा हो सकता है क्योंकि सोयाबीन के हाजिर दाम अभी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम यानी 4,000 रुपये क्विंटल के आसपास चल रहे हैं।
उक्त खबर की वजह से सोयाबीन तिलहन के दाम में गिरावट देखी गई जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये के लगभग 51 पैसे (अस्थायी) टूटने के कारण खरीद का दाम बढ़ने से सोयाबीन तेल कीमत में सुधार दर्ज हुआ।
सूत्रों ने कहा कि सबसे सस्ता होने तथा त्योहारी मांग की वजह से बिनौला तेल कीमत में भी सुधार दर्ज हुआ।
उन्होंने कहा कि किसानों के कम दाम पर बिकवाली से बचने के लिए आवक घटाने के कारण जहां मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया। वहीं, मलेशिया एक्सचेंज की मजबूती और एक बार फिर से सोयाबीन के मुकाबले सीपीओ का भाव ऊंचा हो जाने के कारण सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार दर्ज हुआ।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,200-6,300 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 5,575-5,900 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,250 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,190-2,490 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,500 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,335-2,435 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,335-2,460 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 13,300 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,850 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 13,800 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,225-4,275 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 3,925-3,975 रुपये प्रति क्विंटल।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 25, 2025 07:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

