म्नुचिन के ऊपर आरोप है कि वह फेडरल रिजर्व के द्वारा चलाये जा रहे कई आपात ऋण कार्यक्रमों को रोक रहे हैं। इससे कोरोना वायरस से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने में बाइडन के विकल्प सीमित हो रहे हैं।
म्नुचिन ने एक समाचार चैनल को दिये साक्षात्कार में कहा कि इन कार्यक्रमों का अच्छे से उपयोग नहीं किया जा रहा था। कांग्रेस इन कार्यक्रमों की धनराशि को छोटे व्यवसायों के अनुदान में पुन: आवंटित कर या बेरोजगारी मदद में बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकती है।
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उन्होंने कहा, ‘‘हम कुछ भी रोकने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। हमें कॉरपोरेट बांड खरीदने के लिये इन पैसों की जरूरत नहीं है। हम इन पैसों से उन छोटे व्यवसायों की मदद करना चाहते हैं, जो अभी भी बंद हैं।’’
म्नुचिन ने कहा कि यह निर्णय कांग्रेस को कोरोना वायरस से संबंधित अन्य योजनाओं (कार्यक्रमों) में 455 अरब डॉलर का उचित तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करेगा।
फेडरल रिजर्व ने अपने कॉरपोरेट ऋण, नगर निगम ऋण और मेन स्ट्रीट ऋण कार्यक्रमों को बंद करने वाले म्नुचिन के कदम का शुरू में विरोध किया था, लेकिन बाद में फेड ने अपना रुख नरम कर लिया था।
फेडरल रिजर्व की ओर से शुक्रवार को जारी एक पत्र में चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक आपात ऋण कार्यक्रमों को बंद करने के म्नुचिन के अनुरोध का पालन करेगा और बचे हुए धन को वापस वित्त मंत्रालय को दे देगा।
हालांकि म्नुचिन के इस कदम की आलोचना भी की जा रही है। कई आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार राजनीति करने का कोई मौका नहीं चूक रही है। उद्योग व वाणिज्य संगठन यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी म्नुचिन के इस निर्णय की आलोचना की है।
स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि आपात ऋण कार्यक्रमों को बंद करने के म्नुचिन के निर्णय से आर्थिक जोखिम उत्पन्न होते हैं।
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