रांची, आठ दिसंबर झारखंड में किसानों के ‘भारत बंद’ का मिला-जुला असर रहा तथा यह लगभग शांतिपूर्ण भी रहा। इस दौरान राज्य में जहां सभी सरकारी कार्यालय खुले रहे, वहीं निजी संस्थान तथा प्रतिष्ठान आंशिक तौर पर बंद रहे। स्थानीय यातायात मुख्यत: सामान्य रहा, लेकिन अंतरराज्यीय यातायात ठप रहा। इस दौरान शांति भंग होने की आशंका में गुमला, जमशेदपुर, धनबाद और गढ़वा में कुल 581 लोगों को हिरासत में लिया गया।
राजधानी रांची, धनबाद, हजारीबाग, जमशेदपुर, पलामू, दुमका, बोकारो, साहिबगंज, पाकुड़ समेत सभी 24 जिलों में किसानों के ‘भारत बंद’ का मिला-जुला असर देखने को मिला और यह शांतिपूर्ण रहा।
झारखंड पुलिस के प्रवक्ता पुलिस महानिरीक्षक साकेत कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में सभी जिलों में बंद शांतिपूर्ण रहा और कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
उन्होंने बताया कि धनबाद के गोविंदपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद समर्थकों द्वारा जाम किया गया और हजारीबाग के बरही चौक, डिस्ट्रिक्ट मोड़ पर बड़ी गाड़ियों को रुकवाया गया लेकिन शेष सभी जिलों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
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इस बीच, गुमला से मिली खबर के अनुसार जिले में कुल 108 प्रदर्शनकारियों की सांकेतिक गिरफ्तारी हुई। इसके अलावा जमशेदपुर में 125, धनबाद में 135 और गढ़वा में 213 बंद समर्थकों को हिरासत में लेकर फिर रिहा कर दिया गया।
सिंह ने बताया कि लातेहार, हजारीबाग, चतरा, गिरिडीह में जाम खत्म कराकर यातायात सामान्य कर दिया गया।
इस बीच, राजधानी रांची में केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के सभी कार्यालयों में आम दिनों की तरह सामान्य ढंग से कामकाज हुआ लेकिन निजी संस्थानों और दुकानों तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बंद का आंशिक असर रहा।
झारखंड चैंबर्स ऑफ कामर्स ने बंद का विरोध किया था और कहा कि वह इसका समर्थन नहीं करता।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस एवं राष्ट्रीय जनता दल के साथ वामपंथी दलों ने बंद का समर्थन किया और राजधानी रांची समेत अनेक शहरों में इसके समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया।
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बंद को सफल बताया।
इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दीपक प्रकाश ने आज हेमंत सरकार पर हमला बोला और दावा किया कि किसानों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए बंद के आह्वान को पूरी तरह नकार दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य के शासक और सत्ताधारी दलों को जनता ने ठुकरा दिया है। वामपंथी पार्टियां तो बिन पेंदी का लोटा हो गई हैं और यही कारण है कि वे पूरी दुनिया से समाप्त हो रही हैं।’’
बंद के चलते स्थानीय यातायात पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन अंतरराज्यीय बस सेवाएं ठप रहीं।
, इन्दु
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