जरुरी जानकारी | विदेशों में मजबूती के बीच तेल तिलहन कारोबार का मिलाजुला रुख

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल विदेशी बाजारों में मजबूती के रुख के बीच दिल्ली बाजार में मंगलवार को तेल-तिलहन कीमतों में कारोबार का मिला जुला रुख दिखा। एक ओर जहां सरसों तेल तिलहन में गिरावट आई, वहीं विदेशी बाजारों में मजबूती की वजह से सोयाबीन तेल तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल कीमतों में मजबूती रही। मूंगफली तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर ही बंद हुए।

मलेशिया एक्सचेंज में 1.5 प्रतिशत की मजबूती थी जबकि शिकागो एक्सचेंज फिलहाल एक प्रतिशत तेज चल रहा है।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि देश में सूरजमुखी का जरुरत से ज्यादा आयात हो रहा है। पहले से ही अगले लगभग चार महीने की जरुरत को पूरा करने लायक स्टॉक जमा है इसके अलावा 31 मार्च तक जिन शुल्कमुक्त आयातित तेलों की लदान हुई है वह मई के मध्य तक बाजारों में आता रहेगा। लेकिन खुदरा विक्रेता कंपनियों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारण का जो तरीका है उसकी वजह से उपभोक्ताओं को सस्ता सूरजमुखी तेल काफी ऊंचे दाम पर खरीदना पड़ रहा है।

सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की भरमार से तो देश के तिलहन किसानों और घरेलू तेल उद्योग को तो नुकसान है ही लेकिन कम से कम उपभोक्ताओं को ही राहत मिले इसके लिए सरकार को मौजूदा समय में निजी कारोबारियों से निविदा मंगाकर सस्ते में उपलब्ध सूरजमुखी तेल का कम से कम 4-5 लाख टन आयात करवा लेना चाहिये और उन कंपनियों से इसकी पैकिंग कर बाजार में उपलब्ध कराने को कहना चाहिये।

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि जुलाई अगस्त में आयात किया जाने वाला सूरजमुखी तेल मौजूदा भाव से 7-8 रुपये प्रति लीटर सस्ता है। इससे एमआरपी की दिक्कत समाप्त होगी और मुद्रास्फीति भी कम होगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को यह तेल 92-98 रुपये लीटर के भाव उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी।

सूत्रों ने कहा कि सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे सॉफ्ट आयल के आयात में डेढ़ से दो महीने का समय लगता है जबकि पामोलीन और पाम का आयात करने में लगभग 15 दिन लगते हैं। सरकार को मौजूदा समय में सस्ते में उपलब्ध नरम तेलों (सॉफ्ट आयल) का स्टॉक भी आरक्षित कर लेना चाहिये ताकि संकट के समय इसे उपयोग में लाया जा सके।

सस्ते आयातित तेलों के दवाब के कारण सरसों के बाजार में नहीं खपने से सरसों की कीमतों पर दवाब है इसलिए इनके दाम में गिरावट है। लेकिन विदेशी बाजारों में तेजी की वजह से सोयाबीन तेल तिलहन, सीपीओ, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में सुधार है। मूंगफली तेल तिलहन की एक अलग हैसियत है और इसपर आयात बढ़ने या घटने का विशेष असर देखने को नहीं मिलता जिनके तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,335-5,430 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,790-6,850 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,660 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,535-2,800 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,520 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,665-1,735 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,665-1,785 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 11,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 11,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,350 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,900 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,350 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,500 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,415-5,465 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,165-5,265 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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