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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 24 सितंबर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि कुछ लोग "निहित स्वार्थों " के लिए संसद से पारित कृषि विधेयकों पर भ्रामक मिथक फैला रहे हैं और अपने छोटे-मोटे राजनीतिक लाभों के लिए किसानों को "भड़काने" की कोशिश कर रहे हैं।

कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सिंह ने कहा कि कृषि विधेयकों से कृषि क्षेत्र का लोकतांत्रिकरण होगा, जिसमें किसान अपनी फसल को किसी को भी, कहीं भी बेच सकते हैं। किसान के पास अधिक मुनाफा कमाने के लिए बड़ी कंपनियों से जुड़कर फसल बेचने की आजादी और विकल्प होगा।

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राज्यसभा ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को भारी हंगामे के बीच रविवार को पारित कर दिया था।

इन विधेयकों को पहले ही लोकसभा पारित कर चुकी है।

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किसान संगठनों और विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि ये विधेयक बड़े कारोबारियों के लिए लाए गए हैं जो भारतीय खाद्य एवं कृषि व्यवसाय पर प्रभुत्व जमाना चाहते हैं और इनसे किसानों की मोलभाव करने की शक्ति कमजोर होगी।

दूरदर्शन को दिए गए साक्षात्कार में, सिंह ने कहा " मूर्खतापूर्ण विडंबना यह है कि कुछ प्रावधानों के नाम पर निराधार अफवाहें फैलाई जा रही हैं जिनका मोदी सरकार द्वारा संसद में लाए गए विधेयकों में बिल्कुल भी अस्तित्व नहीं हैं।"

उन्होंने कहा " उदाहरण के लिए, किसानों को यह विश्वास दिलाने के लिए व्यापक रूप से अभियान चलाया जा रहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रोक लगा दी गई है, जबकि विधेयकों में ऐसा कोई संदर्भ ही नहीं है।"

मंत्री ने कहा, "यह स्पष्ट रूप से इस बात को इंगित करता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली पहले की तरह जारी रहेगी।"

सिंह ने आरोप लगाया, " जो लोग इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं और किसानों को भड़का रहे हैं, वे वास्तव में इसे, व्यर्थ में ही, चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बाजार प्रणाली पहले की तरह लागू रहेगी और कृषि एवं खाद्य नीति केंद्र (एएफपीसी) भी जारी रहेगा।

सिंह ने कहा, " किसानों को यह समझाते हुए भड़काया जा रहा है कि उन्हें अनुबंध के नाम पर बड़ी कंपनियों के शोषण का शिकार होना पड़ेगा।"

उन्होंने कहा, "इसके बिल्कुल विपरीत, विधेयक में किसान को किसी भी प्रकार के शोषण से बचाने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।"

सिंह ने कहा कि अनुबंध और समझौतों के माध्यम से किसानों को तय मूल्य प्राप्त होने की गारंटी मिलेगी और किसान किसी भी समय बिना किसी अर्थदंड के इसे वापस ले सकते हैं।

उन्होंने कहा, " केवल इतना ही नहीं बल्कि विधेयकों में किसानों की जमीन की बिक्री, पट्टा या गिरवी रखने पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है, क्योंकि यह समझौता फसलों के लिए है न कि जमीन के लिए। इसलिए यह सरासर गलत व्याख्या है कि बड़े व्यवसायी किसानों की जमीन हड़पकर उन्हें बंधुआ मजदूर बना देंगे।"

तीन विधेयकों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास उनकी मंजूरी के लिए भेजा गया है।

बुधवार को 18 विपक्षी पार्टियों ने कोविंद से आग्रह किया था कि वह इन विवादित विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करें और आरोप लगाया था कि उन्हें "असंवैधानिक तरीके से" और संसदीय नियमों का "पूरी तरह से अपमान" करते हुए पारित किया गया है।

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