देश की खबरें | खनन पट्टा: उच्चतम न्यायालय हेमंत सोरेन के खिलाफ जांच से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगा

नयी दिल्ली, 19 मई उच्चतम न्यायालय झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों तथा सहयोगियों द्वारा चलायी जा रही कुछ छद्म कंपनियों को खनन पट्टों की कथित मंजूरी की सीबीआई तथा प्रवर्तन निदेशालय की जांच से जुड़ी एक याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने के लिए राजी हो गया।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा मुकुल रोहतगी की इन दलीलों पर गौर किया कि यह एक गंभीर मामला है, जिसमें जांच एजेंसी नोटिस जारी करने से पहले झारखंड उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज दाखिल कर रही है तथा इसे दूसरे पक्ष को नहीं दे रही है।

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘हम इसे कल सूचीबद्ध करेंगे।’’

वरिष्ठ अधिवक्ताओं में से एक ने कहा, ‘‘यह एक गंभीर विषय है, जिसका मैं उल्लेख करना चाहता हूं। झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी है जिसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है। इसके बावजूद, ईडी ने आकर सीलबंद दस्तावेज सौंप दिए।”

दोनों वकीलों ने कहा कि इन सीलबंद दस्तावेजों को रिकॉर्ड में ले लिया गया है और मामला, जिसमें कोई तात्कालिकता नहीं है, उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।

शीर्ष अदालत को बताया गया कि उच्च न्यायालय मुख्यमंत्री तथा उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों द्वारा चलाई जा रही कुछ छद्म कंपनियों को कथित तौर पर दिए गए खनन पट्टों की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने का अनुरोध करने वाली दो जनहित याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई जारी रखेगा।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

अरुण दुबे नामक शख्स द्वारा दायर जनहित याचिका को लेकर कथित मनरेगा घोटाले में ईडी ने जांच की।

ईडी ने कथित मनरेगा घोटाले के सिलसिले में निलंबित खनन सचिव एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी पूजा सिंघल और चार्टर्ड एकाउंटेंट सुमन कुमार के यहां छापेमारी और उनकी गिरफ्तारी के बाद ताजा निष्कर्षों पर सोमवार को सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)