नयी दिल्ली, 24 मई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि केवल इसलिए कि किसी व्यक्ति का नाम किसी विधेय अपराध में नहीं लिया गया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उस पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।
न्यायालय ने धनशोधन मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की अवकाशकालीन पीठ सुधीर गुप्ता नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में उनके खिलाफ प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) और उसके बाद की कार्यवाही को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
पीठ ने गुप्ता की ओर से अदालत में पेश हुए वकील विजय अग्रवाल से कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ईसीआईआर को न तो रद्द किया जा सकता है और न ही उस पर रोक लगाई जा सकती है।
अग्रवाल ने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एक संबंधित मामले में गवाह के रूप में पेश किया गया था, लेकिन ईडी ने उन्हें धनशोधन मामले में आरोपी बना दिया है।
पीठ ने कहा, ‘‘सिर्फ इसलिए कि आपका नाम कथित अपराध में नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप पर पीएमएलए के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।’’
अग्रवाल ने कहा, ‘‘मेरा मामला यह है कि, मैं इस मामले में गवाह हूं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘हम संतुष्ट नहीं हैं।’’
इसने कहा, ‘‘हमने मामले के गुण-दोष की भी जांच की है। न तो ईसीआईआर को रद्द किया जा सकता है और न ही इस पर रोक लगाई जा सकती है।’’
याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि मामला जून में एक विशेष अदालत के समक्ष आरोपों पर बहस के लिए सूचीबद्ध है।
उन्होंने पीठ से बाद में उच्चतम न्यायालय में जाने की छूट के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।
पीठ ने कहा, ‘‘मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना वापस लेने की अनुमति दी जाती है।’’
ईसीआईआर को रद्द करने के अनुरोध के अलावा, याचिकाकर्ता ने ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत को भी रद्द करने का आग्रह किया था।
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