नयी दिल्ली, 15 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों की समस्या एक गंभीर मुद्दा है जिससे तत्काल निपटने की जरूरत है। अदालत ने नगर निगम आयुक्त से इस दिशा में उचित कार्रवाई करने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने यह निर्देश उस महिला के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकियों को रद्द करते हुए दिया, जिसके खिलाफ आरोप था कि उसके कुत्तों ने 2014 में अलग-अलग मौकों पर एक व्यक्ति और उसके पिता को काट लिया था।
दोनों पक्षों- महिला और उसके पड़ोसियों- द्वारा पिछले साल सौहार्दपूर्ण ढंग से मामला सुलझाने के बाद अदालत ने प्राथमिकी रद्द कर दी।
अदालत ने कहा, ‘‘दोनों पक्ष पड़ोसी हैं। उनके बीच विवाद मुख्य रूप से निजी प्रकृति का है और उन्होंने अपने सभी विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है। न्याय की दृष्टि से विवाद खत्म करना ही बेहतर होगा। यह देखते हुए कि दोनों पक्ष आपसी समझौते के कारण मौजूद शिकायतें आगे बढ़ाना नहीं चाहते हैं, ऐसे में दोषसिद्धि की संभावना भी क्षीण होगी।’’
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा, ‘‘मुझे समझौते को अस्वीकार करने का कोई कारण नहीं दिखता। हालांकि, आवारा कुत्तों के खतरे का मुद्दा गंभीर है, जिसे संबंधित प्राधिकारी द्वारा तत्काल निपटने की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा कि इस आदेश की एक प्रति उचित कार्रवाई के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त को भेजी जाए।
महिला ने दलील दी थी कि एक पशु प्रेमी होने के नाते वह नियमित रूप से अपने पड़ोस में रहने वाले आवारा कुत्तों और छोटे पिल्लों को खाना खिलाती है।
उन्होंने कहा कि जिन कुत्तों ने शिकायतकर्ताओं को कथित तौर पर काटा था, वे आवारा जानवर कुत्ते थे, न कि उनके पालतू। उन्होंने आगे कहा कि वह आवारा कुत्तों पर कोई नियंत्रण नहीं रख सकती थीं।
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