नयी दिल्ली, 14 दिसंबर राज्यसभा में मंगलवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने सरकार द्वारा लाए गए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे सीबीआई के कामकाज में स्थिरता आएगी और भ्रष्टाचार पर काबू पाने में मदद मिलेगी वहीं कुछ सदस्यों ने कहा कि देश भर के लोगों में एजेंसी के प्रति काफी भरोसा है और उसे कायम रखा जाना चाहिए।
कुछ सदस्यों ने कई मामलों की जांच में काफी देरी होने पर चिंता जतायी और जवाबदेही तय करने की मांग की। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने निलंबित 12 सदस्यों का निलंबन वापस लिए जाने की मांग करते हुए सदन से वाकआउट किया।
इस विधेयक में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष बढ़ाने और पांच वर्ष की अवधि तक उसे विस्तार दिये जाने का प्रावधान है। अभी तक इनके कार्यकाल की सीमा दो वर्ष थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिह ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन संशोधन विधेयक, 2021 पेश करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने की अपनी नीति पर कायम है और उसने अब तक इस दिशा में ऐसे कदम उठाए हैं जिससे उसकी नीति स्पष्ट होती है।
सिंह ने भ्रष्टाचार, आतंकवाद और धनशोधन सहित विभिन्न समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि अभी तक कानून में कार्यकाल के संबंध में केवल न्यूनतम सीमा तय थी और कार्यकाल को लेकर कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई थी, हमने इसकी सीमा पांच वर्ष तय कर दी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया भर की मशहूर जांच एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के कार्यकाल की सीमा दो वर्ष नहीं है।
सीबीआई के निदेशक का चयन प्रधानमंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता की एक समिति की सिफारिश के आधार पर होता है।
इस दौरान कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने निलंबित 12 सदस्यों का निलंबन वापस लिए जाने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उपसभापति हरिवंश से कहा कि उन्होंने आसन को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है और विपक्ष सहयोग कर रहा है लेकिन बाहर बैठे सदस्यों का निलंबन वापस लिया जाना चाहिए।
इस पर हरिवंश ने कहा कि इस संबंध में सभापति ने पहले ही व्यवस्था दे दी है और वह सूचीबद्ध विषय के अलावा अन्य मुद्दे उठाने की अनुमति नहीं दे सकते। इसके बाद कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों से सदन से वाकआउट किया।
चर्चा की शुरूआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के डीपी वत्स ने कहा कि भ्रष्टाचार देश की एक प्रमुख समस्या है और इस विधेयक के प्रावधानों से इस समस्या पर काबू पाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देशों की प्रमुख जांच एजेंसियों के निदेशकों का औसत कार्यकाल पांच से 10 साल का होता है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई के बारे में कहा था कि यह ‘पिंजरे में बंद तोता’ है और यह विधेयक उसे मुक्त कराने की दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अब भी चाहता है कि तोता पिंजरे में ही बंद रहे।
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