देश की खबरें | त्रावणकोर शाही परिवार की सदस्य श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के खजाने की प्रदर्शनी के खिलाफ

तिरुवनंतपुरम, 10 अगस्त त्रावणकोर शाही परिवार की एक वरिष्ठ सदस्य ने बृहस्पतिवार को कहा कि श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के खजाने की वस्तुएं प्रदर्शित करने वाली चीजें नहीं हैं और इसलिए, उन्हें कभी भी किसी संग्रहालय में सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए नहीं ले जाया जाना चाहिए।

शाही परिवार की सदस्य अश्वथी थिरुनल गौरी लक्ष्मी बाई ने कहा कि ये (खजाने में रखी वस्तुएं) वर्षों से शाही परिवार के साथ-साथ अन्य लोगों द्वारा देवता को अर्पित की गई थीं और ‘‘इन्हें पर्यटक आकर्षण के रूप में प्रदर्शित करना अस्वीकार्य है।’’

सोशल मीडिया मंच पर अपलोड किए गए एक वीडियो में, उन्होंने कहा कि जहां तक उनकी जानकारी है, भारत में कहीं और मंदिरों के खजाने या सोने को संग्रहालयों में प्रदर्शनी के लिए नहीं रखा गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे प्रदर्शनी हॉल कहीं और नहीं देखे गये हैं। फिर श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर में क्यों? मुझे बस इतना ही कहना है।’’

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी राय है।

इससे पूर्व दिन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि वह यहां श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के खजाने को संग्रहालय में प्रदर्शित करने संबंधी किसी भी कदम का विरोध करेगी।

भाजपा की केरल इकाई के अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने राज्य में सत्तारूढ़ वाम मोर्चे और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को मंदिर के खजाने का प्रदर्शन करने की कोशिश करने की चुनौती दी और कहा कि ऐसा कोई भी कदम सफल नहीं होगा।

सुरेंद्रन ने हिंदू देवता के बारे में विधानसभा अध्यक्ष ए. एन. शमसीर की कथित टिप्पणी के खिलाफ यहां एक विरोध मार्च को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यटकों को आकर्षित करने और राजस्व उत्पन्न करने के लिए मंदिर के खजाने की सार्वजनिक प्रदर्शनी आयोजित करने के बारे में राज्य विधानसभा में चर्चा हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और यूडीएफ अपनी तिजोरियों से खजाना बाहर लाने और फिर इसका इस्तेमाल अपने लिए राजस्व उत्पन्न करने के बारे में सोच रहे हैं, तो ऐसी योजनाओं का भाजपा द्वारा विरोध किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि मंदिर के तहखानों से खजाना बाहर लाने के किसी भी प्रयास को भाजपा विफल कर देगी, भले ही दोनों मोर्चे इस प्रयास के लिए एक साथ आ जाएं।

खजाने को प्रदर्शित करने का सुझाव सदन में कांग्रेस विधायक ए. पी. अनिल कुमार ने रखा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने इसका समर्थन किया।

कांग्रेस के दो विधायकों-तिरुवंचूर राधाकृष्णन और पी सी विष्णुनाथ ने हालांकि इस विचार का विरोध किया।

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