शिलांग, 27 अगस्त मेघालय उच्च न्यायलय ने राज्य में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को फटकार लगाई है और उसे निर्देश दिया कि वह सभी जवानों पर कोविड-19 नियमों को समान रूप से लागू करे, भले ही उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो।
न्यायमूर्ति एचएस थांगखिव्यू और न्यायमूर्ति वानलुरा दियेंगदोह की पीठ ने कोविड-19 महामारी को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर 24 अगस्त को दिए अपने आदेश में यह कहा।
अदालत में सुनवाई के दौरान बीएसएफ ने लौट कर आ रहे अपने जवानों के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) सौंपी, जिसमें परिवार के साथ आने वाले जवानों को स्वयं पंजीकरण और पृथक-वास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत में सौंपी गई एसओपी में उल्लेख किया गया है कि पृथक-वास केंद्र लौट कर आ रहे बीएसएफ के अन्य जवानों के लिए उपलब्ध है। वहां केंद्रीय गृह मंत्रालय और बीएसएफ मुख्यालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है।
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इस पर पीठ ने अफसोस जताया कि परिवार के साथ लौट रहे जवानों को बगैर सहायता के उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
पीठ ने कहा, ‘‘अदालत की राय है कि यह अस्वीकार्य है, सभी जवान चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित हो बीएसएफ के लिए काम कर रहे हैं और उनके साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि वादी संख्या-12 (बीएसएफ) तुरंत प्रक्रिया को ठीक करेगा और सुनिश्चित करेगा कि दिशानिर्देशों और नियमों को सभी जवानों पर एक समान लागू हो, चाहे उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो।’’
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