मुंबई, नौ जुलाई महाराष्ट्र सरकार ने बम्बई उच्च न्यायालय को बृहस्पतिवार को बताया कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच स्नातकोत्तर एमडी और एमएस पाठ्यक्रमों के लिए सालाना परीक्षाएं आयोजित करने संबंधी फैसला लेने के लिए बैठकें की जा रही हैं।
डॉ. निशांत गब्बूर ने याचिका दायर कर महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (एमयूएचएस) को स्नातकोत्तर एमडी/एमएस पाठ्यक्रम के लिए सालाना परीक्षाएं आयोजित करने और तिथियों की घोषणा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
याचिका के अनुसार, कोविड-19 के कारण परीक्षाएं दो बार स्थगित की गई हैं।
न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति वी जी बिष्ट की खंडपीठ ने इस याचिका की सुनवाई की।
सहायक सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने याचिका पर जवाब देने के लिए समय मांगा और कहा कि सरकार इस मामले पर बैठकें कर रही है।
चव्हाण ने कहा कि परीक्षाओं का समय निर्धारित करने और सुरक्षा संबंधी मामलों पर चर्चा की जा रही है, क्योंकि यह कोविड-19 से निपटने के लिए ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट चिकित्सकों और परीक्षार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की।
मुंबई के सेठ जी एस मेडिकल कॉलेज में एमएस की पढ़ाई कर रहे गब्बूर (स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान) पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित डीएम/एमसीएच पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा में देशभर में दूसरे स्थान पर आए थे।
याचिका में कहा गया है कि पीजीआईएमईआर ने 30 जून को गब्बूर को अस्थाई दाखिला पत्र दिया था और छह जुलाई तक दाखिला लेने को कहा था। पीजीआईएमईआर में दाखिले के लिए एमडी/एमएस डिग्री होना अनिवार्य है।
याचिका में कहा गया है कि एमयूएचएस ने अभी तक सालाना परीक्षाएं आयोजित नहीं की है, तो ऐसे में संभावना है कि पीजीआईएमईआर याचिकाकर्ता को दाखिला न दे।
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