नई दिल्ली: भारत सरकार ने बुधवार, 25 मार्च को उन सभी सोशल मीडिया (Social Media) अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें 2026 में संभावित 'देशव्यापी लॉकडाउन' (Nationwide Lockdown) का दावा किया जा रहा था. आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा मार्गों के प्रभावित होने के बावजूद, सार्वजनिक आवाजाही को रोकने या आर्थिक गतिविधियों को बंद करने की कोई योजना नहीं है. गौरतलब है कि ये अफवाहें 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन (COVID-19 Lockdown) की छठी बरसी पर तब शुरू हुईं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने संसद में अपने संबोधन के दौरान भविष्य की चुनौतियों के लिए 'तैयारी' का आह्वान किया था. यह भी पढ़ें: Fact Check: क्या भारत में फिर लगेगा लॉकडाउन? 24 मार्च को 'Lockdown in India' सर्च में अचानक उछाल की ये है असली वजह
लॉकडाउन की अफवाहों का आधार
सर्च इंजन और सोशल मीडिया पर 'लॉकडाउन' शब्द का ट्रेंड प्रधानमंत्री मोदी के लोकसभा में दिए गए उस भाषण के बाद बढ़ा, जिसमें उन्होंने महामारी के दौरान बाधित हुई सप्लाई चेन और वर्तमान मध्य पूर्व संकट के बीच समानताएं बताई थीं.
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसी 'संकल्प और एकता' का आग्रह किया था, जो 2020 के स्वास्थ्य संकट के दौरान देखी गई थी. हालांकि, उनके द्वारा उपयोग किए गए 'कोविड जैसी तैयारी' शब्द की ऑनलाइन गलत व्याख्या की गई और इसे नए स्टे-एट-होम ऑर्डर के संकेत के रूप में प्रचारित किया गया. सरकारी सूत्रों ने जोर देकर कहा कि इस तुलना का उद्देश्य प्रशासनिक तत्परता को उजागर करना था, न कि शारीरिक प्रतिबंध लगाना.
ऊर्जा सुरक्षा और स्थिर सप्लाई चेन
प्रशासन के लिए वर्तमान में सबसे बड़ी चिंता 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के माध्यम से होने वाले व्यापार में रुकावट है, जो भारत के ईंधन आयात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत के रणनीतिक भंडार और विविध स्रोतों ने घरेलू स्टॉक को स्थिर रखा है.
एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं.' सरकार ने ईंधन, उर्वरक और गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की निगरानी के लिए सात 'अधिकार प्राप्त समूह' (Empowered Groups) सक्रिय किए हैं.
पैनिक और गलत सूचनाओं पर लगाम
हैदराबाद और कोच्चि जैसे कई शहरों में ईंधन की कमी की अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों और एलपीजी वितरकों के पास भीड़ देखी गई. इसके जवाब में IOCL, BPCL और HPCL जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने नोटिस जारी कर पुष्टि की है कि सभी रिटेल आउटलेट पूरी तरह से स्टॉक में हैं और सामान्य रूप से काम कर रहे हैं.
गलत सूचनाओं को रोकने के लिए सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- आवश्यक सेवाओं को सहयोग देने के लिए राज्यों को 50% कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति बहाल की गई है.
- एलपीजी रिफिल की मौजूदा समयसीमा (शहरी क्षेत्रों के लिए 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन) को यथावत रखा गया है.
- आयातित सिलेंडरों पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार में तेजी लाई गई है. यह भी पढ़ें: West Asia Crisis: पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई अहम बात; भारत ने 'तनाव कम करने और शांति बहाली' का दिया संदेश
जमाखोरी के खिलाफ देशव्यापी अभियान
बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने देशव्यापी प्रवर्तन अभियान शुरू किया है. अकेले कल लगभग 2,700 छापेमारी की गई, जिसमें 2,000 से अधिक अवैध रूप से जमा किए गए एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए. राज्य सरकारों को स्टॉक की निगरानी करने और कालाबाजारी को रोकने के लिए 24/7 कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया गया है.
अधिकारियों ने नागरिकों से केवल सत्यापित सरकारी पोर्टलों पर भरोसा करने और सामान्य उपभोग पैटर्न जारी रखने का आग्रह किया है. उन्होंने दोहराया कि वर्तमान स्थिति एक प्रबंधनीय आर्थिक चुनौती है, न कि कोई सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल.












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