कोलकाता, छह मार्च तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने बृहस्पतिवार को जिला पदाधिकारियों के साथ बैठक की जिसमें हाल ही में घर-घर जाकर मतदाता सूची की पड़ताल के निष्कर्षों पर चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब आरोप लगाये जा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हेराफेरी कर रही है।
बैठक में मतदाता सूचियों में पहचानी गई ‘‘अनियमितताओं’’ के मुद्दे से निपटने के लिए पार्टी के अगले कदमों को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तृणमूल प्रतिनिधियों द्वारा आज शाम कोलकाता में निर्वाचन आयोग से औपचारिक रूप से ज्ञापन सौंपने की भी उम्मीद है।
पिछले सप्ताह की शुरुआत में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर निर्वाचन आयोग के कथित समर्थन से मतदाता सूची में “बाहरी” मतदाताओं को शामिल करने का आरोप लगाया था।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख बनर्जी ने दावा किया था कि भाजपा ने पिछले चुनावों में हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में भी इसी तरह की रणनीति अपनायी थी।
इसके बाद, तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी ने जिला स्तर के नेताओं को अपने क्षेत्रों में मतदाता सूचियों की गहन पड़ताल करने के लिए चार निर्देश जारी किए थे।
निर्देशों के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया 10 दिनों के भीतर पूरी होने की उम्मीद है। बृहस्पतिवार की बैठक के दौरान, उम्मीद है कि जिला अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी उन विसंगतियों की जानकारी देंगे जिसका पता उन्हें चला है।
ममता बनर्जी द्वारा गठित एक विशेष समिति के सदस्य बैठक में मौजूद रहेंगे, जिनमें अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ ब्रायन, सुदीप बंदोपाध्याय जैसे वरिष्ठ नेता और अन्य शामिल हैं।
संबंधित घटनाक्रम में, बर्धमान-दुर्गापुर से तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद ने बुधवार को दुर्गापुर में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक रैली के दौरान दावा किया कि निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल भाजपा ने अन्य राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने के लिए किया है।
प्रदेश भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल के दावों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के लोग उस पार्टी से अवगत हैं जो वास्तव में देश की प्रगति का नेतृत्व कर रही है। उन्होंने तृणमूल की टिप्पणियों को अधिक तवज्जो नहीं दी और उन्हें निराधार बताया।
ममता बनर्जी यह आरोप लगाए जाने के एक दिन बाद कि भाजपा निर्वाचन आयोग की मदद से मतदाता सूची में फर्जी मतदाताओं को जोड़ रही है, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने कहा था कि राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (बीएलओ) की सक्रिय भागीदारी से अधिकारियों द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन किया जा रहा है।
सीईओ ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी विशिष्ट दावे या आपत्ति को पश्चिम बंगाल में बीएलओ, एईआरओ (सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) और ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) को सौंपा जाना चाहिए।
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