नयी दिल्ली, 13 जून सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया को ऑनलाइन सट्टेबाजी मंचों के विज्ञापनों को प्रकाशित करने से बचने का परामर्श देते हुए कहा कि सट्टेबाजी और जुआ देश के ‘‘ज्यादातर हिस्सों’’ में अवैध हैं और ये उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय और सामाजिक-आर्थिक जोखिम पैदा करते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल और ऑनलाइन मीडिया में ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइटों/मंचों के विज्ञापनों के अनेक मामले पाए जाने के बाद यह परामर्श व्यापक जनहित में जारी किया गया है।
मंत्रालय ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ऑनलाइन सट्टेबाजी मंचों के विज्ञापन प्रकाशित करने से बचने की सलाह दी है। इसने ऑनलाइन विज्ञापन मध्यस्थों और प्रकाशकों सहित ऑनलाइन और सोशल मीडिया को भारत में ऐसे विज्ञापन प्रदर्शित नहीं करने या भारतीय दर्शकों के लिए ऐसे विज्ञापनों को लक्षित नहीं करने की सलाह दी है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘देश के ज्यादातर हिस्सों में सट्टेबाजी और जुआ अवैध है और उपभोक्ताओं, विशेष रूप से युवाओं और बच्चों के लिए अत्यधिक वित्तीय और सामाजिक-आर्थिक जोखिम पैदा करते हैं।’’
इसमें यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी पर इन विज्ञापनों का ‘‘इस निषिद्ध गतिविधि’’ को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलता है।
मंत्रालय ने अपने परामर्श में कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के विज्ञापन भ्रामक हैं, और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियमन अधिनियम, 1995 के तहत विज्ञापन कोड और भारतीय प्रेस परिषद द्वारा प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के तहत निर्धारित पत्रकारिता आचरण के मानदंडों के अनुरूप नहीं हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चार दिसंबर, 2020 को निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को एक परामर्श जारी किया था, जिसमें प्रिंट और ऑडियो विजुअल विज्ञापनों के लिए ‘ऑनलाइन गेमिंग’ के विज्ञापनों पर भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) के दिशानिर्देशों ‘‘विशेष तौर पर क्या करें और क्या न करें’’ का पालन करने के लिए कहा गया था।
एएससीआई दिशानिर्देशों में यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे प्रत्येक विज्ञापन में एक ‘डिस्क्लेमर’ होना चाहिए, जिसे प्रिंट मीडिया के मामले में ऐसे लिखा जाना चाहिए‘‘इस खेल में वित्तीय जोखिम का एक तत्व शामिल है और इसकी लत लग सकती है। कृपया जिम्मेदारी से और अपने जोखिम पर खेलें।’’
एएससीआई दिशानिर्देशों में उल्लेख किया गया है कि इस तरह के ‘डिस्क्लेमर’ को विज्ञापन में कम से कम 20 प्रतिशत जगह दी जानी चाहिए।
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