नयी दिल्ली, 12 मई दिल्ली की महापौर शैली ओबेरॉय ने शुक्रवार को कहा कि एमसीडी की स्थाई समिति के छह सदस्यों को चुनने के लिए फिर से मतदान कराने में कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा। वहीं, दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिर से चुनाव कराने को चुनौती देने वाली भाजपा पार्षदों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
उच्च न्यायालय ने भाजपा पार्षदों कमलजीत सहरावत और शिखा रॉय की याचिका पर 25 फरवरी को फिर से चुनाव कराने पर रोक लगा दी थी।
एक ओर जहां भाजपा पार्षदों के वरिष्ठ वकीलों ने पहले दलील दी थी कि निर्वाचन अधिकारी (महापौर) ओबेरॉय ने जब परिणाम को ‘‘राजनीतिक रूप से अप्रिय’’ पाया, तो दुर्भावनापूर्ण तरीके से फिर से चुनाव कराने की बात कही। वहीं, ओबेरॉय की ओर से शुक्रवार को उपस्थित हुए वरिष्ठ वकील ने रेखांकित किया कि 24 फरवरी को चुनाव के दौरान हुए हंगामे के मद्देनजर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए फिर से मतदान कराना आवश्यक है।
ओबेरॉय की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने कहा, ‘‘फिर से मतदान कराने में कोई पूर्वाग्रह नहीं है। कृपया जांच कर लें कि कहीं उन्हें (याचिकाकर्ताओं) इससे कोई नुकसान तो नहीं होगा----।’’
मेहरा ने सवाल किया, ‘‘क्या व्यवस्था बची थी? क्या यह पूरी तरह से अनुचित था? उन्होंने दोबारा गिनती नहीं होने दी। भाजपा पार्षदों ने हंगामा किया। मतपत्र और गिनती वाले दस्तावेज बदल गए।’’
महापौर की ओर से ही पेश हुए वरिष्ठ वकील राजशेखर राव ने कहा कि अदालत के हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनाया गया और प्राधिकारी सिर्फ यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि प्रक्रिया कानून के मुताबिक हो। उन्होंने दावा किया कि निगम सचिव ने भी अपनी रिपोर्ट में ‘मतगणना में अनियमितता’ की बात कही थी।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
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