ताजा खबरें | मनुस्मृति ने नहीं संविधान ने हमें बोलने का अधिकार दिया : खरगे

नयी दिल्ली, तीन फरवरी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाने में संविधान के महत्व का हवाला देते हुए सोमवार को राज्यसभा में कहा कि मनुस्मृति ने नहीं, बल्कि संविधान के कारण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट पेश करने का मौका मिला और संसद में सभी तबके को बोलने का अधिकार दिया।

राज्यसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष खरगे ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘‘संविधान की वजह से ही वित्त मंत्री को बजट पेश करने का मौका मिला, न कि मनुस्मृति की वजह से। हमें संविधान की वजह से ही बोलने का अधिकार मिला है। मनुवादियों की बात मत सुनें।"

खरगे उच्च सदन में मनुस्मृति की एक प्रति लेकर आए थे। मनुस्मृति एक प्राचीन हिंदू कानूनी ग्रंथ है जिसमें 12 अध्याय और 2,694 श्लोक हैं।

खरगे ने नरेन्द्र मोदी सरकार के 11 साल के शासन पर तीखा हमला करते हुए विकास, रोजगार, किसान कल्याण और संघीय ढांचे के मोर्चों पर पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया।

खरगे ने दावा किया कि केवल चार महीनों में 12,000 एमएसएमई (सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम) बंद हो गए। उन्होंने रेलवे और बंदरगाहों के निजीकरण की आलोचना करते हुए दावा किया कि उन्हें केवल ‘अदाणी’ को सौंप दिया गया।

खरगे ने केंद्र पर राज्यपालों को सशक्त बनाकर विपक्ष शासित राज्यों में निर्वाचित सरकारों को कमजोर करने तथा संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया, खासकर तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल में।

उन्होंने कहा, ‘‘संघीय ढांचे को नष्ट किया जा रहा है। कोई भी व्यक्ति स्थायी नहीं है। कोई गलत मिसाल कायम नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे लोकतंत्र और संविधान पर असर पड़ेगा।’’ उन्होंने दावा किया कि विपक्ष शासित राज्यों में राज्यपाल छह महीने तक फाइलों को मंजूरी नहीं देते हैं। उन्होंने कहा, "राज्यपाल लोगों के लिए कम और केंद्र सरकार के लिए ज़्यादा काम कर रहे हैं।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)