इंफाल, 8 जुलाई : मणिपुर उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को जिरीबाम हत्याकांड पर ‘विस्तृत प्रगति रिपोर्ट’ पेश करने का निर्देश दिया है. पिछले साल नवंबर में जिरीबाम हत्याकांड के दौरान कुकी हमार के उग्रवादियों ने मेइती समुदाय की तीन महिलाओं और तीन बच्चों को मार डाला था. अदालत ने कहा, ‘‘अगर आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जाता है, तो मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.’’ मुख्य न्यायाधीश के. सोमशेखर और न्यायमूर्ति अहंतेम बिमोल सिंह की खंडपीठ ने सोरम टेकेंद्रजीत द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के बाद सोमवार को यह निर्देश जारी किया.
अदालत ने जांच में स्पष्ट प्रगति की कमी पर चिंता व्यक्त की. 11 नवंबर, 2024 की घटना का हवाला देते हुए पीठ ने कहा, ‘‘सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसी दिन एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. हालांकि, आज तक जांच एजेंसी द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 के प्रावधानों के तहत कोई प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है और ना ही कोई आरोपपत्र दायर किया गया है.’’ अदालत ने कहा, ‘‘घटना को हुए सात महीने से अधिक समय हो गया है. यदि आरोपपत्र दायर नहीं किया गया है, तो मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.’’यह भी पढ़ें : आंबेडकर चाहते थे कि न्यायपालिका कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त हो: प्रधान न्यायाधीश गवई
एनआईए को एक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 24 जुलाई की तारीख तय की है. पिछले साल 11 नवंबर को कुकी हमार उग्रवादियों ने जिरीबाम जिले के बोरोबेकरा इलाके से तीन मेइती महिलाओं और तीन बच्चों (जिनमें एक 10 महीने का शिशु भी शामिल था) का अपहरण कर लिया था. बाद में उनके गोलियों से छलनी शव 15 नवंबर को मणिपुर-असम सीमा पर बराक नदी से बरामद किये गए थे. हमले के दौरान दो नागरिक भी मारे गए और कई घर जला दिए गए थे.












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