इंफाल, 22 जून मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा और असम के मंत्री हिमंत विश्व सरमा ने मणिपुर में सत्तारूढ़ गठबंधन के नौ सदस्यों के इस्तीफे से उत्पन्न राजनीतिक गतिरोध का रास्ता निकालने के लिए भाजपा और एनपीपी के विधायकों के साथ जो चर्चा की थी उसके बारे में राजग के केंद्रीय नेतृत्व को अवगत करा दिया गया है। यह जानकारी दोनों पार्टियों के सूत्रों ने सोमवार को दी।
क्षेत्रीय दल नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संगमा और भाजपा के संकटमोचक सरमा ने रविवार को मणिपुर के अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों दलों के विधायकों के साथ मुलाकात की थी। मणिपुर में भाजपा नीत गठबंधन को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस ने एक नया गठबंधन बनाया है।
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असम के मंत्री सरमा नार्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) के संयोजक भी हैं।
दोनों मणिपुर की राजधानी से रविवार देर रात में लौटे।
कोनराड संगमा ने इंफाल से रवाना होने से पहले कहा कि मणिपुर मुद्दे को राजग के केंद्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाया गया है।
दोनों वरिष्ठ नेता भाजपा विधायकों के साथ-साथ भाजपा की क्षेत्रीय सहयोगी एनपीपी के विधायकों से बातचीत के वास्ते यहां हवाई मार्ग से आये थे ताकि दोनों दलों के बीच मतभेदों को दूर किया जा सके।
एनपीपी भी सत्ताधारी भाजपा नीत राजग का हिस्सा है।
एन बिरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार उस समय संकट में आ गई जब भाजपा नीत गठबंधन के नौ सदस्यों ने गत बुधवार को इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने वालों में एनपीपी के चार मंत्री भी शामिल थे।
संगमा मेघालय में सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं और वह राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन में हैं। भाजपा के दो विधायकों ने भी राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवार की जीत में योगदान किया था।
विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल किया है कि संगमा और सरमा को कोविड-19 नियमों के तहत उस तरह से पृथक क्यों नहीं किया गया जैसे उसके दो पर्यवेक्षकों अजय माकन और गौरव गोगोई को तब पृथक किया गया था जब वे गत शुक्रवार को इंफाल पहुंचे थे।
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