इम्फाल, 19 मई मणिपुर सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखकर अपील की है कि वह राज्य में स्थित एनएससीएन-आईएम के ‘अनधिकृत’ शिविरों को नगालैंड स्थानांतरित कर दे। यह अनुरोध हाल में नागरिक संगठनों द्वारा इस तरह के दो शिविरों में रह रहे उग्रवादी समूह के कार्यकर्ताओं के बीच कथित तौर पर राहत सामग्री का वितरण किये जाने के बाद किया गया है।
मुख्य सचिव जे सुरेश बाबू ने गृह मंत्रालय को लिखे पत्र में इस मुद्दे पर जोर दिया है। इसमें कहा गया है, ‘‘बड़ी संख्या में नागरिक संगठनों को इन शिविरों में खुलेआम आमंत्रित किया गया।’’
मणिपुर के सेनापति जिले में हुथरोंग ब्रिगेड कैम्प तथा चंदेल जिले में आशिहो चाओमई बटालियन में क्रमश: आठ मई और 13 मई को एनएससीएन-आईएम के ‘अनधिकृत’ शिविरों में नागरिक संगठनों के सदस्यों को उग्रवादी संगठन के लोगों के बीच राहत सामग्री वितरित करते हुए देखा गया था, जिसके बाद इसको लेकर विवाद पैदा हो गया।
पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर राहत सामग्री वितरित करने का वीडियो शेयर किया गया, जिससे ‘राज्य सरकार को शर्मसार होना पड़ा।’
इसमें यह कहा गया कि इन शिविरों की निगरानी करने वाले केंद्रीय सुरक्षा बल भी उन्हें अवैध गतिविधि करने से ‘रोक पाने में असफल रहे।’
राज्य सरकार ने पत्र में कहा, ‘‘नागरिक संगठनों के इन स्थानों पर लगातार आने-जाने के हालिया घटनाक्रमों को रोका जा सकता था।’’
पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय से इसका गंभीरता से संज्ञान लेने और सेना तथा असम राइफल्स को एनएससीएन-आईएम की गतिविधियों को नियंत्रित करने का निर्देश देने की मांग की है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इन शिविरों में लोगों और नागरिक संगठनों के लोगों को आने-जाने से रोका जाए।
पत्र में कहा गया है, ‘‘केंद्रीय गृह मंत्रालय से निवेदन है कि वह इन शिविरों को मणिपुर से हटा करके इन्हें नगालैंड स्थानांतरित करने का भी निर्देश दे।’’
मणिपुर सरकार का कहना है कि ‘संघर्ष विराम समझौता मणिपुर में लागू नहीं है, इसके बाद भी ये शिविर राज्य में हैं।
एनएससीएन-आईएम और केंद्र सरकार के बीच 1997 में संघर्ष विराम समझौता हुआ, जिसके बाद इस उग्रवादी संगठनों के सदस्यों को तय शिविरों में ही रहना था।
वहीं, एक समझौते के मसौदे पर तीन अगस्त 2015 को एनएससीएन-आईएम और केंद्र के वार्ताकार आर एन रवि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर किया।
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