नागपुर....चंद्रपुर, 22 जून ताडोबा अंधेरी बाघ रिजर्व (टीएटीआर) में पांच लोगों की जान लेने वाले नर बाघ की महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित एक बचाव केंद्र में सोमवार को मौत हो गई।
वन विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि बाघ को इस महीने की शुरुआत में पकड़ा गया था और 11 दिन पहले बचाव केंद्र में लाया गया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या ऐसा लगता है कि वयस्क बाघ की मौत सेप्टिसीमिया से हुई होगी।
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बाघ का आधिकारिक नाम के टी-एक था और वह चंद्रपुर में स्थित टीएटीआर के भीतर और आसपास घूमता रहता था।
बाघ ने अलग-अलग घटनाओं में कोलारा, बमनगांव और सतारा जिले में पिछले पांच महीने के दौरान पांच लोगों को मार डाला था।
एक वन अधिकारी ने बताया कि पिछली घटना छह जून को हुई थी जिसके बाद बाघ को बेहोश कर कोलारा वन क्षेत्र के पास पकड़ा गया था।
अधिकारी ने कहा, “महाराष्ट्र मुख्य वन्यजीव वार्डन ने बाघ को पकड़ने की अनुमति आठ जून को दी थी। बाघ को 10 जून को बेहोश किया गया और 11 जून को गोरेवाड़ा बचाव केंद्र में लाया गया। सोमवार को उसकी मौत हो गई।”
गोरेवाड़ा परियोजना के मंडलीय प्रबंधक की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, बाघ की भूख कम हो गई थी और उसे यहां के परिवेश से तालमेल बिठाने में दिक्कत हो रही थी।
विज्ञप्ति के अनुसार , 22 जून को पौने सात बजे वन विभाग के कर्मियों ने बाघ को निढाल पड़ा देखा। पशु चिकित्सकों ने बाघ को सुबह सात बजे मृत घोषित कर दिया।
विज्ञप्ति में कहा गया, “प्रथम दृष्टया बाघ की मौत का कारण सेप्टिसीमिया लगता है। हालांकि अंतिम पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सटीक कारण का पता चल पाएगा।”
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