नागपुर, 21 दिसंबर राज्य में विधान परिषद के एक सदस्य (एमएलसी) ने बुधवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय विभाग ने दलित आवासीय क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करने के लिए 36 करोड़ रुपये की बढ़ी हुई कीमत पर किताबें खरीदीं।
आरोपों के बाद राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने जांच कराए जाने का आश्वासन दिया है।
एमएलसी कपिल पाटिल ने विधान परिषद में आरोप लगाया था कि राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने दलित आवासीय क्षेत्रों में पुस्तकालय खोलने के लिए कुछ महीने पहले 36 करोड़ रुपये की किताबें खरीदीं, जबकि किताबों की मूल कीमत दो करोड़ रुपये भी नहीं है।
उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग को संभालने वाले चंद्रकांत पाटिल ने कहा, “राज्य सरकार सदस्य कपिल पाटिल द्वारा किए गए दावों की जांच करेगी कि राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने बढ़ी हुई कीमत पर किताबें खरीदीं। हम सदन के सामने विवरण पेश करेंगे।”
कपिल पाटिल ने कहा था, “नियुक्त की गई एजेंसी ने राज्य से 36 करोड़ रुपये वसूले, जो बहुत गंभीर मामला है और इसकी जांच की जरूरत है।”
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई एक भी पुस्तक बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी, सावित्री फुले, ज्योतिबा फुले और कर्मवीर भाऊराव पाटिल के जीवन के बारे में नहीं है।
उन्होंने कहा, “एक भी खरीदी गई किताब उनके काम, उनके विचारों आदि के बारे में नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सामाजिक न्याय विभाग के लिए किताबें खरीदने के लिए शब्दालय एजेंसी को नियुक्त किया गया था और ऐसा लगता है कि उन्होंने असंबंधित किताबें खरीदी हैं, जो अब वितरित होने जा रही हैं। इसे रोका जाना चाहिए और भुगतान को रोका जाना चाहिए।’’
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