मुंबई, 15 सितंबर बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र प्रशासनिक अधिकरण (मैट) को अदालत के आदेश की प्रतीक्षा किए बगैर स्वयं कार्यालय उपलब्ध कराने पर फैसला लेना चाहिए।
न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार अधिवक्ता योगेश मोरबाले द्वारा रिक्तियों और मैट के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।
मैट के अधिवक्ता अमृत जोशी ने अदालत को आज बताया कि मेट्रो परियोजना के कारण मैट के कार्यालय को मौजूदा विधानभवन परिसर के पास से नरीमन प्वाइंट स्थानांतरित करना है ।
मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) पहले मैट को मासिक किराए के रूप में 33 लाख रुपये देता था । लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव को जुलाई में भेजे गए एक पत्र में एमएमआरसीएल ने कहा कि मेट्रो परियोजना में देरी के कारण वह आर्थिक परेशानी में है और मैट को किराए का पैसा नहीं दे पाएगा।
उसने कहा कि राज्य सरकार मैट को इसका भुगतान करे।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वह दो सप्ताह के बाद मामले की सुनवाई करेगा लेकिन सरकार को उसके आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए।
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