देश की खबरें | कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र को प्रवासी श्रमिकों के मामले में ठोस प्रयास करने होंगे: न्यायालय
जियो

नयी दिल्ली, नौ जून उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र से मंगलवार को कहा कि उसे इस स्थित में अधिक सतर्क रहना होगा और अपने पैतृक स्थानों को जाने के लिये वहां फंसे कामगारों की पहचान कर उन्हे भेजने के लिये ठोस प्रयास करने होंगे।

शीर्ष अदालत ने मंगलवार को अपने पैतृक स्थान जाने के इच्छुक श्रमिकों की पहचान करके 15 दिन के भीतर उन्हें ट्रेन या बसों से उनके गंतव्य तक पहुंचाने का केन्द्र और सभी राज्यों को निर्देश देने संबंधी आदेश में महाराष्ट्र सरकार की खामियों को इंगित किया। न्यायालय ने कहा कि कामगारों के मसले से निबटने में प्राधिकारियों की ‘काफी खामियां’ रही हैं और उसने कहा कि सरकार इन श्रमिकों के पंजीकरण के लिये एक उचित स्थान की घोषणा करे।

यह भी पढ़े | पूर्व पीएम एच.डी. देवगौड़ा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किया नामांकन , कांग्रेस ने समर्थन का दिया भरोसा.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने राज्य सरकार के इस कथन का जिक्र किया कि अभी भी अपने पैतृक स्थान लौटने के लिये 37,000 श्रमिक प्रतीक्षा में हैं और उसने रेलवे से इसके लिये एक ट्रेन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि महाराष्ट्र में अभी भी फंसे हुये उन श्रमिकों की पहचान करने के लिये राज्य सरकार को अधिक सतर्कता बरतने के साथ ही ठोस प्रयास करने होंगे जो अपने पैतृक स्थान लौटना चाहते हैं।’’

यह भी पढ़े | कोरोना के आन्ध्र प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 147 मरीज पाए गए, 2 की मौत: 9 जून 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

पीठ ने कहा कि सरकार को उन श्रमिकों की पहचान और पंजीकरण के लिये पुलिस थाना या ऐसे ही किसी उचित स्थान का प्रचार और घोषणा करनी चाहिए जिन्हें अभी तक अपनी यात्रा के लिये ट्रेन या बस नहीं मिल सकी है।

पीठ ने कहा कि राज्य स्तर और जिला स्तर की पर्यवेक्षण समितियों तथा उनके अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपने अपने घर लौटने के इच्छुक सारे प्रवासी कामगारों की पहचान की जाये और उन्हें खाना पानी तथा ठहरने की सुविधा प्रदान की जाये और यात्रा के दौरान उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध नहीं कराने के बारे में कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए।

न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि वह लौट रहे सभी कामगारों को खाना और ठहरने की सुविधा प्रदान कर रही है और इन श्रमिकों की सूची भी तैयार की है लेकिन इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले विभिन्न पक्षकारों ने अपने हलफनामों में उसके दावों को गलत बताया है।

पीठ ने कहा कि सरकार की नीतियों और फैसलों पर सरकारी प्राधिकारियों द्वारा अमल के मामले में काफी खामियां हैं और उसके अधिकांश दावे सिर्फ कागजों पर ही हैं और ये इन कामगारों के लिये बहुत अधिक परेशानियां पैदा कर रहे है।

महाराष्ट्र सरकार ने न्यायालय को बताया था कि उसने 12 लाख से ज्यादा प्रवासी कामगारों को उनके पैतृक स्थानों पर भेजा है और इनमें से पांच लाख से ज्यादा यात्रियों को राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों से नि:शुल्क भेजा गया है।

न्यायालय के एक सवाल पर राज्य सरकार ने कहा कि करीब 37,000 कामगार अभी भी अपने घरों के लिये लौटने के इंतजार में है और इन्हें भेजने के लिये एक ट्रेन मुहैया कराने का रेलवे से अनुरोध किया गया है।

कोविड-19 महामारी से बुरी तरह ग्रस्त देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में अब तक 1,702 व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है और इससे संक्रमित मामलों की संख्या भी 50,000 से ज्यादा हो चुकी है।

महाराष्ट्र में सोमवार की शाम तक इस संक्रमण की पुष्टि वाले मामलों की संख्या बढ़कर 88,528 हो गयी थी और मृतकों की संख्या भी 3,169 तक पहुंच गयी थी।

पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनाये गये अपने 30 पेज के आदेश में कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित गुजरात और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों द्वारा उठाये जा रहे कदमों का भी जिक्र किया है।

न्यायालय ने इस समस्या के विभिन्न पहलुओं के बारे में उठाये जा रहे कदमों की जानकारी के साथ अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिये सभी राज्यों को दो सप्ताह का समय दिया है। न्यायालय ने केन्द्र को भी इन कामगारों के कल्याण के लिये विभिन्न योजनाओं को रिकार्ड पर लाने का निर्देश दिया है।

न्यायालय ने दिल्ली सरकार के इस कथन का भी संज्ञान लिया कि 236 रेलगाड़ियों से करीब तीन लाख प्रवासी श्रमिकों और बसों से करीब 12,000 कामगारों को उनके घर भेजा जा चुका है।

शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार के इस कथन को भी दर्ज किया कि दिल्ली सरकार के वेब पोर्टल पर करीब साढ़े छह लाख श्रमिकों ने अपना पंजीकरण कराया है और करीब दो लाख कामगारों ने औद्योगिक इकाईयों में फिर से काम शुरू होने की उम्मीद में अपने घर नहीं जाने का निर्णय लिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि उसके यहां करीब 25 लाख कामगार सुरक्षित लौट आये हैं और सरकार ने नि:शुल्क गांवों तक पहुंचा रही है।

बिहार सरकार ने भी न्यायालय को बताया है कि उसके यहां भी करीब 28 लाख श्रमिक लौट आये हैं और सरकार उनके लिये काउन्सलिंग केन्द्र स्थापित कर रही है जिनमें इन कामगारों के कौशल का परीक्षण होगा ताकि उनके लिये रोजगार के अवसरों की पहचान की जा सके।

भाशा अनूप

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)