नयी दिल्ली, तीन फरवरी बीजू जनता दल (बीजद) की सदस्य सुलता देव ने महाकुंभ में कृत्रिम मेधा (एआई) सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बावजूद मृतकों और लापता श्रद्धालुओं के आंकड़ों को पता करने में सरकार की असमर्थता पर सोमवार को सवाल उठाया।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान देव ने कहा कि इस घटना पर सदन में अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए।
मौनी अमावस्या के मौके पर 29 जनवरी को अमृत स्नान के दौरान भगदड़ मच गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 30 लोग मारे गए और 60 अन्य घायल हो गए थे।
देव ने सवाल किया, "राष्ट्रपति ने कुंभ मेले में मृतकों के लिए दुख व्यक्त किया। कुंभ में जो कुछ भी हुआ और जो स्थिति है, उसकी आलोचना होनी चाहिए क्योंकि हम जानते हैं कि हजारों लोग बेघर हो गए हैं और खो गए हैं और उनका पता नहीं लगाया जा सका है। अगर हम एआई से भीड़ की संख्या देख सकते हैं तो हम तकनीक की मदद से यह क्यों नहीं देख पा रहे हैं कि कितने लोग गायब हैं। इसकी आलोचना क्यों नहीं की जा रही है?"
उन्होंने कहा कि जब 27 जुलाई को दिल्ली में जलजमाव की घटना में छात्रों की मौत हो गई तब इस पर अल्पकालिक चर्चा हुई थी तो महाकुंभ की घटना पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती है।
उन्होंने कहा, “कुंभ में हुआ हादसा एक बड़ा मुद्दा हुआ है तो फिर हम इस पर चर्चा क्यों नहीं कर रहे हैं। हमने सुबह भी मांग की थी कि चर्चा होनी चाहिए। कितने बच्चे खो गए हैं, लोग अपने परिवार की तलाश में परेशान हैं और परिवार मुश्किल में हैं। इस पर आलोचना होनी चाहिए लेकिन नहीं हो रही है।"
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति को दिया गया अभिभाषण सरकार द्वारा तैयार किया गया है क्योंकि उनके राज्य से संबंधित किसी मुद्दे का इसमें जिक्र नहीं है।
देव ने बताया कि कंधमाल जिले के मंडीपांका गांव में आम की गिरी पायसम खाने से तीन महिलाओं की मौत हो गई लेकिन कहीं भी इसकी चर्चा सुनाई नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा, “वे भी अनुसूचित जनजाति श्रेणी के थे। अगर हम एआई, विकसित भारत के बारे में बात कर रहे हैं तो हम मंडीपांका के बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं।"
बीजद सांसद ने आंध्र प्रदेश में विकसित की जा रही पोलावरम परियोजना पर भी चिंता जताई।
देव ने कहा, “आपने पोलावरम की सराहना की, लेकिन आप (राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू) ओडिशा की बेटी हैं और ओडिशा के लिए एक शब्द नहीं कहा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है और क्योंझर जिले में प्रस्तावित कारखाने से संबंधित मामलों में उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है, जो ओडिशा के मुख्यमंत्री (मोहन चरण माझी) का निर्वाचन क्षेत्र है।
उन्होंने कहा, “आप आदिवासी समुदाय से हैं। वर्तमान में क्योंझर से एक आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। आदिवासी होने के नाते आदिवासियों के लिए लड़ना बहुत जरूरी है। वर्तमान में कोई भी मीडिया इन सभी को नहीं दिखा रहा है। कोई भी सरकार से सवाल नहीं कर रहा है।"
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने ओडिशा में उनकी सरकार द्वारा प्रवासी भारतीय दिवस आयोजित किए जाने का उल्लेख किया।
देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आठ जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस का उद्घाटन करने आए थे।
उन्होंने कहा, "उसी दिन सुबह लगभग 9 बजे, दिनदहाड़े एक पुलिस मुखबिर शहादेब नायक का सिर कलम कर दिया गया, जहां प्रवासी भारतीय दिवस आयोजित किया गया था। यह क्या है? प्रधानमंत्री खुद वहां हैं, एनआरआई हैं। पुलिस हर तरफ मौजूद है लेकिन अगर ऐसा कुछ सुबह नौ बजे हो रहा है तो कानून-व्यवस्था कहां है?"
उन्होंने खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का मुद्दा भी उठाया।
असम गण परिषद के बीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने चर्चा के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के प्रस्तावित बांध का मुद्दा उठाया और इस मामले में सरकार से हस्तक्षेप का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, "अब चीन ने ब्रह्मपुत्र में बिजली उत्पादन के लिए एक बड़ा बांध बनाने का फैसला किया है। एक बार जब वे बन जाएंगे तो वे ब्रह्मपुत्र और अधिशेष पानी को चीन की ओर मोड़ देंगे। अगर ऐसा हुआ तो ब्रह्मपुत्र सूख जाएगी। हमारी सभ्यता खत्म हो जाएगी। हमारा सामाजिक जीवन और अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी।"
उन्होंने कहा कि असम को बचाने के लिए, पूर्वोत्तर क्षेत्र को बचाने के लिए भारत सरकार को इस मुद्दे को चीन के साथ बहुत गंभीरता से उठाना चाहिए।
बैश्य ने कहा, "अगर जरूरी हो तो कृपया पूर्वोत्तर क्षेत्र के हित के लिए इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएं।"
अन्नाद्रमुक सदस्य एम. थंबीदुरई ने अन्ना विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न का मुद्दा उठाया और मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
द्रमुक के एम. षणमुगम ने तमिलनाडु के साथ सौतेला व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में महंगाई और बेरोज़गारी जैसी बुनियादी समस्याओं पर कुछ भी नहीं बोला गया।
भारतीय जनता पार्टी के रामचन्द्र जांगड़ा और बंशीलाल गुर्जर ने भी चर्चा में भाग लिया।
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