(तस्वीरों सहित)
(हर्षवर्धन प्रकाश)
इंदौर (मध्यप्रदेश), दो जुलाई ‘इंदौर की हेलन केलर’ के रूप में मशहूर 34 वर्षीय गुरदीप कौर वासु बोल, सुन और देख नहीं सकतीं, लेकिन ये शारीरिक बाधाएं उन्हें सरकारी सेवा में आने का सपना देखने से नहीं रोक सकीं।
गुरदीप का यह सपना सामाजिक, अकादमिक और सरकारी गलियारों से होकर गुजरे उनके लम्बे संघर्ष के बाद आखिरकार पूरा हो गया है। उन्हें प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग में नियुक्ति मिली है।
सामाजिक न्याय कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह देश का पहला मामला है, जब बोल, सुन और देख नहीं सकने वाली कोई महिला सरकारी सेवा में आई है।
गुरदीप इंदौर की हेलन केलर के रूप में विख्यात हैं। हेलन एडम्स केलर एक दिव्यांग अमेरिकी लेखिका थीं जिन्होंने बोलने, देखने और सुनने में असमर्थ होने के बावजूद जानवरों से लेकर महात्मा गांधी तक पर लेख लिखे थे। 1999में टाइम मैगजीन ने केलर को बीसवीं सदी के सर्वाधिक सौ महत्वपूर्ण लोगों की सूची में शामिल किया था।
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि कक्षा 12 तक पढ़ी गुरदीप को बहुविकलांगता की श्रेणी में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के तौर पर इंदौर में वाणिज्यिक कर विभाग के एक दफ्तर में पदस्थ किया गया है।
विभाग की अतिरिक्त आयुक्त सपना पंकज सोलंकी ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि दिव्यांगजनों के लिए विशेष भर्ती अभियान के तहत गुरदीप का चयन उनकी योग्यता के आधार पर किया गया है।
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