जबलपुर, पांच अप्रैल मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भूमि मुआवजा से संबंधित मामले में निचली अदालत के 'अस्पष्ट' आदेश को खारिज कर दिया है और न्यायाधीश पर रिपोर्ट मांगी है।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) को सिंगरौली जिले के देवसर में पदस्थ चतुर्थ जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा पर 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि शर्मा द्वारा पिछले पांच वर्षों में विभिन्न पदों पर रहते हुए संभाली गई फाइलों का 'निरीक्षण' तीन महीने में किया जाए।
न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा, "चतुर्थ जिला न्यायाधीश (भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार) अधिनियम की धारा 64 में निहित प्रावधान को पढ़ने में विफल रहे हैं और उन्होंने एक अस्पष्ट आदेश पारित कर दिया।"
उन्होंने बृहस्पतिवार को न्यायालय के आदेश में कहा कि यदि जिला न्यायाधीश ने 2013 के अधिनियम की धारा 64 के प्रावधानों को पढ़ने का प्रयास किया होता, तो ऐसा "अस्पष्ट" आदेश पारित नहीं किया जाता।
उच्च न्यायालय ने कहा कि दिनांक 03.08.2024 के विवादित आदेश को रद्द किया जाता है और मामले को संबंधित जिला न्यायाधीश के पास आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर तीस दिनों के भीतर निर्णय लेने के लिए फिर से भेजा जाता है।
सिंगरौली जिले के गोडवाली गांव के निवासी मंगल शरण के स्वामित्व वाली 0.01 हेक्टेयर भूमि का एक हिस्सा ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित किया गया था।
याचिकाकर्ता शरण इस बात से दुखी हैं कि अधिकारियों ने मुआवजे के लिए जमीन पर विचार किया, लेकिन उस पर बने घर पर नहीं।
उनके वकील नित्यानंद मिश्रा ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि नियमों के अनुसार, याचिकाकर्ता ने सिंगरौली कलेक्टर के समक्ष एक आवेदन दायर किया, जिसमें घर के लिए भी मुआवजा मांगा गया, लेकिन अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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