अम्बाला, 10 मई कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये जारी लॉकडाउन के बीच सदानंद नामक एक प्रवासी श्रमिक ने 29 अप्रैल को अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ पंजाब के पटियाला से अपने घर उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर आने के लिये साइकिल से यात्रा शुरू की थी।
सदानंद के तीन साल के बेटे की तबीयत बिगड़ जाने के बाद उसे उसी दिन हरियाणा के अम्बाला में अपनी यात्रा रोकनी पड़ी।
पंजाब हरियाणा सीमा पर सदानंद ने चिकित्सकीय सहायता के लिये पुलिस से संपर्क किया । पुलिस ने बच्चे को अम्बाला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप सिंह के पास पहुंचाया ।
बाद में, डाक्टरों को पता चला कि बच्चे के दिल में छेद है ।
अब सदानंद को यह लगता है कि वह भाग्यशाली है कि उसके गांव पहुंचने से पहले बेटे की बीमारी का पता चल गया है।
उसने कहा, ‘'मैं अपने को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं लॉकडाउन के दौरान फंस गया और यह मेरे लिये वरदान के रूप में सामने आया है ।'’
शुरू में बच्चे को पंजाब में एक निजी अस्पताल में भेजा गया था ।
सदानंद के पास पर्याप्त पैसा नहीं है कि वह वापस अंबाला आये क्योंकि उसे कहा गया है कि यह इलाज खर्चीला है ।
इसके बाद बच्चे को आगे की जांच एवं इलाज के लिये अम्बाला शहर के मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया ।
अस्पताल के निदेशक डॉ. सुनील सादिक विभिन्न जांच के बाद इस निस्कर्ष पर पहुंचे हैं कि बच्चे को तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है ।
अस्पताल पिछले एक हफ्ते से परिवार को मुफ्त आवास एवं भोजन मुहैया करा रहा है।
अस्पताल में रक्तदान शिविर का उद्घाटन करने आये अम्बाला शहर के विधायक असीम गोयल ने बच्चे के इलाज के लिये अपने गैर सरकारी संगठन की ओर से 31 हजार रुपये दिये हैं।
गोयल ने वादा किया है कि वह बाकी के रुपयों का भी इंतजाम करेंगे । उसके इलाज पर करीब साढे़ तीन लाख रुपये का खर्च आयेगा ।
इस बीच रोटरी क्लब अम्बाला ने भी आगे आकर इस खर्च का अधिकतर हिस्सा वहन करने की घोषणा की है ।
बच्चे को सोमवार को पंचकूला के एक निजी अस्पताल में ले जाया जायेगा जहां उसका अपरेशन होगा ।
सदानंद ने कहा कि अगर वह गांव चला जाता तो इस तरह की आर्थिक सहायता इतनी जल्दी संभव नहीं था और बच्चे के जीवन को खतरा हो सकता था ।
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