कोलकाता, 22 सितंबर शराब विनिर्माताओं ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से त्यौहारों और दुर्गा पूजा से पहले शराब पर मौजूदा कर ढांचे में बदलाव नहीं करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इससे बाजार प्रभावित होगा साथ ही राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान भी होगा।
कंफडरेशन ऑफ इंडियन एल्कोहॉलिक बेवरेजेस कंपनीज (सीआईएबीसी) और इंटरनेशनल स्प्रिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) ने मुख्यमंत्री को संयुक्त तौर पर एक पत्र लिखकर कहा कि यदि पूजा से पहले मौजूदा कर ढांचे को बदला जाता है तो यह फैसला उद्योग के साथ-साथ सरकार के लिये भी नुकसानदायक हो सकता है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने शराब पर 30 प्रतिशत बिक्री कर लगा दिया था। इससे शराब की बिक्री में व्यापक गिरावट आयी है और इसका असर राज्य के खजाने पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि जुलाई और अगस्त में शराब की बिक्री की मात्रा में भी कमी आयी है। ऐसे में शराब की अधिकतम खुदरा कीमत बढ़ाने का कोई भी कदम राज्य सरकार के राजस्व में कमी ला सकता है।
सीआईएबीसी के महाप्रबंधक विनोद गिरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के आबकारी विभाग की 19 अगस्त 2020 को प्रस्तावित नीति ने कंपनियों के बीच चिंता को बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि उद्योग को डर है कि इस नीति से दुर्गा पूजा के सबसे व्यस्त समय से पहले बाजार में व्यवधान पैदा होगा। नौकरियों के जाने की संभावना भी है।
गिरी ने सरकार से मौजूदा कर ढांचे को अगले 12 महीने तक बनाए रखने और अन्य राज्यों के बराबर समानता लाने का आग्रह किया।
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