कोच्चि, 13 जून अस्पताल के कमरे में बैठीं जेनेह पाये को उम्मीद है कि वह अपने ढाई वर्षीय बेटे के साथ जल्द ही इस बंदरगाह शहर से हजारों मील दूर लाइबेरिया में अपने परिवार के पास पहुंचेंगी।
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान अपने देश लौटने में विफल रहीं 26 वर्षीय जेनेह अपने पुत्र जिन के साथ दो महीने से अधिक समय से नि जी अस्पताल में ठहरी हुई हैं। वह हृदय के गंभीर रोग से पीड़ित अपने बेटे का इलाज कराने यहां आई थीं जो सर्जरी के बाद दो महीने पहले ही ठीक हो चुका है।
महिला को उम्मीद है कि भारत सरकार उनकी और उनके पुत्र की स्वदेश वापसी में मदद करेगी।
अस्पताल के एक प्रवक्ता ने बताया कि जिन जन्म के समय से ही हृदय रोग से पीड़ित था। उसे मोनरोविया स्थित अस्पताल से बेहतर उपचार के लिए रेफर किए जाने के बाद मार्च के प्रथम सप्ताह में अस्पताल में भर्ती किया गया था। 12 मार्च को उसकी ओपन हार्ट सर्जरी की गई।
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सर्जरी के चलते जिन के स्वास्थ्य में सुधार के बाद जेनेह दो अप्रैल को लाबइेरिया वापस जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से ऐसा नहीं हो पाया।
जेनेह ने मीडिया को जारी एक वीडियो संदेश में भारत सरकार से अपील की कि वह उनकी स्वदेश वापसी में मदद करे।
उन्होंने वीडियो में कहा, ‘‘मैं जेनेह हूं। मैं अपने बेटे की सर्जरी के लिए लाइबेरिया से आई थी। अब उसकी सर्जरी हो चुकी है...हमें यहां काफी वक्त हो गया है। हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि कृपया हमारी वापसी का इंतजाम किया जाए।’’
लाइबेरिया में मौजूद उनके पति पीटर ने भी वीडियो संदेश भेजकर भारत सरकार से अपनी पत्नी और पुत्र की वापसी में मदद करने का आग्रह किया।
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