बेंगलुरु, नौ अगस्त कर्नाटक के कृषि मंत्री एन चेलुवरायस्वामी ने बुधवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से अपील की कि वह ‘‘गैर जिम्मेदाराना तरीके के लगाए आरोपों और फर्जी अर्जियों’’ के झांसे में नहीं आएं।
चेलुवरायस्वामी की अपील मांड्या जिले के सात सहायक कृषि निदेशकों (एडीए) द्वारा हाल में राज्यपाल गहलोत को लिखे कथित पत्र के बाद आई है। पत्र में सहायक निदेशकों ने आरोप लगाया था कि मंत्री संयुक्त निदेशक के माध्यम से छह से आठ लाख रुपये बतौर रिश्वत देने के लिए दबाव बना रहे हैं।
पत्र के सहायक निदेशकों ने धमकी दी थी कि अगर ‘‘ रिश्वत मांगने की ऐसी परंपरा को रोका नहीं जाता’’ तो वे परिवार सहित आत्महत्या कर लेंगे।
राज्यपाल कार्यालय ने उक्त पत्र मुख्य सचिव वंदिता शर्मा को जांच के लिए सौंप दिया था। हालांकि, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने पत्र को फर्जी बताया था और मामले की जांच सीआईडी से कराने का आदेश दिया था।
राज्यपाल को लिखे पत्र में चेलुवरायस्वामी ने कहा, ‘‘ मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि आप ऐसे गैर जिम्मेदाराना फर्जी आरोपों और फर्जी अर्जियों के झांसे में नहीं आएं।’’
मंत्री ने राज्यपाल से यह भी अपील की कि अगर ऐसी घटना भविष्य में दोबारा होती है तो वह प्राथमिक जांच का आदेश दें। उन्होंने कहा कि अगर प्राथमिक जांच में पत्र प्रामणिक पाया जाता है तो जांच का आदेश दिया जाना चाहिए।
चेलुवरायस्वामी ने कहा, ‘‘अगर यह सही पाया जाता है और सबूत भी इसकी पुष्टि करते हैं तब यह जांच के लिए उपयुक्त हो सकता है अन्यथा संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग असमाजिक तत्व और निहित हित वाले लोग आसानी से सरकार, विभाग और मुझे बदनाम करने के लिए करेंगे।’’
मंत्री ने दावा किया कि पत्र ‘‘पूरी तरह से फर्जी’’ है। उन्होंने कहा कि पत्र के बारे में जानकर वह स्तब्ध हैं।
चेलुवरायस्वामी ने दावा किया कि प्राथमिक जांच में जानकारी मिली कि सहायक निदेशकों ने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है।
उनके मुताबिक जिन सात सहायक निदेशकों ने पत्र लिखा है, उनमें एक रमेश है जो मांड्या जिले में कार्यरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्य अधिकारियों ने भी कहा है कि उन्होंने राज्यपाल को पत्र नहीं लिखा है।
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