देश की खबरें | यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तरकुंजी संबंधी याचिका पर आपत्ति दर्ज कराए : दिल्ली उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, तीन जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) को निर्देश दिया कि वह सिविल सेवा के अभ्यार्थियों के एक समूह द्वारा इस साल की प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी को लेकर दायर याचिका पर अपनी आपत्ति दर्ज कराए।

यूपीएससी का पक्ष रख रहे अधिवक्ता नरेश कौशिक ने न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह की अदालत के समक्ष तर्क दिया कि 17 अभ्यार्थियों की ओर से दायर याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष विचारणीय नहीं है और उन्हें किसी राहत के लिए प्राशसनिक अधिकरण का रुख करना चाहिए।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई26 जुलाई को सूचीबद्ध करते हुए रेखांकित किया कि इस समय याचिकाकर्ता यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 को रद्द करने और सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र एक और दो की दोबारा परीक्षा कराने के अपने अनुरोध पर जोर नहीं दे रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने जून में यूपीएससी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आपत्ति जताई जिसके मुताबिक उत्तर कुंजी अंतिम नतीजे घोषित किए जाने के बाद ही जारी की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं ने इस संबंध में तर्क दिया कि यह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। उनके अधिवक्ता ने कहा कि कुछ अभ्यार्थी पहले ही चयन प्रक्रिया के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) का रुख कर चुके हैं।

यूपीएसएसी के वकील नरेश कौशिक ने कहा कि कानून उच्च न्यायालय को सिविल सेवा भर्ती के विवाद की सुनवाई की अनुमति नहीं देता और प्रेस नोट भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।

न्यायमूर्ति सिंह ने इस पर कहा, ‘‘उन्हें (यूपीएससी के वकील) प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराने दीजिए। मैं केवल प्रेस नोट पर सुनवाई कर रहा हूं।’’

अधिवक्ता राजीव कुमार दुबे के जरिये दायर की गई याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता पूरी भर्ती प्रक्रिया में आयोग की ‘मनमानी’से असंतुष्ट हैं।

उन्होंने तर्क दिया, ‘‘छात्रों को उस परीक्षा की उत्तर कुंजी मुहैया नहीं कराना जिसमें वे शामिल हुए हैं, समय दिए जाने के बाद तय समय में उनकी शिकायतों पर विचार नहीं करना, ऐसे सवाल पूछना जो असंगत रूप से अस्पष्ट हैं, उम्मीदवारों की क्षमता तुक्के से दिए गए उत्तर के आधार पर तय करना न केवल मनमाना है बल्कि यह निष्पक्षता, तर्क और विवेक के सभी सिद्धांतों को भी नकारता है।’’

याचिका में कहा गया कि जब प्रतियोगी परीक्षा कराई जाती है तब बहु विकल्पीय प्रश्नों की उत्तर कुंजी पहले ही तैयार कर ली जाती है ताकि उसे परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद जारी किया जा सके और उम्मीदवार अपने प्रदर्शन का अनुमान लगा सकें।

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