नयी दिल्ली, 30 जनवरी देश में वर्ष 2014-15 में दस हजार की जनसंख्या पर कुष्ठ रोग के मामले 0.69 प्रतिशत थे, जो वर्ष 2021-22 में घट कर 0.45 प्रतिशत हो गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
पवार ने यहां राष्ट्रीय कुष्ठ रोग दिवस मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि इसके अलावा प्रति एक लाख की आबादी पर वार्षिक नए मामले का पता चलने की दर 2014-15 में 9.73 प्रतिशत थी जो 2021-22 में घटकर 5.52 प्रतिशत हो गई है।
इस वर्ष का विषय “आइए हम कुष्ठ रोग से लड़ें और कुष्ठ रोग को एक इतिहास बनाएं” था।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कार्यक्रम में अपने वीडियो संदेश में कहा, “भारत प्रगति कर रहा है और कुष्ठ रोग के नए मामलों में साल दर साल कमी आ रही है। पूरी सरकार, समूचे समाज के समर्थन, तालमेल और सहयोग से, हम एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) से तीन साल पहले 2027 तक ‘कुष्ठरोग मुक्त भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि इस बीमारी का उपचार संभव है हालांकि यदि इसका पता नहीं चलता है और शुरुआती चरण में इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह प्रभावित व्यक्ति में स्थायी दिव्यांगता और विकृति पैदा कर सकता है, जिससे समुदाय में ऐसे व्यक्तियों और उनके परिवार के सदस्यों के साथ भेदभाव हो सकता है।
पवार ने कहा कि देश का कुष्ठरोग निवारण कार्यक्रम जल्द से जल्द मामलों का पता लगाने और उनका इलाज करने का प्रयास करता है, दिव्यांगता और विकृतियों के प्रसार को रोकने के लिए नि: शुल्क उपचार देता है तथा मौजूदा विकृति वाले लोगों का चिकित्सा पुनर्वास करता है।
उन्होंने कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों के बारे में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया
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