देश की खबरें | लखीमपुर हिंसा: न्यायालय ने उप्र सरकार को लगाई फटकार, कहा- राज्य पुलिस धीमी गति से काम कर रही

नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच एक ‘अंतहीन कहानी’ नहीं होनी चाहिए। साथ ही, एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि न्यायालय को ऐसा लग रहा है कि राज्य पुलिस धीमी गति से काम कर रही है।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि उप्र सरकार को अपनी इस छवि को ‘‘बदलने’’ की आवश्यकता है।

न्यायालय ने राज्य सरकार को मजिस्ट्रेट के समक्ष गवाहों के बयान दर्ज कराने और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हमें लगता है कि आप बहुत धीमी गति से काम कर रहे हैं, कृपया अपनी इस छवि को बदलिए।’’

उसने कहा कि जांच ‘‘अंतहीन कहानी’’ नहीं बननी चाहिए। उसने अभियोजन पक्ष के 44 में से करीब 40 गवाहों के बयान आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज नहीं कराए जाने के मामले पर चिंता जताई।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा, ‘‘कृपया उनसे धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहिए। पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।’’

सीआरपीसी की धारा 164 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज किए जाते हैं और उन्हें साक्ष्य माना जाता है।

न्यायालय तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों के मारे जाने के मामले में सुनवाई कर रही। न्यायालय को राज्य सरकार ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 44 में से चार गवाहों के बयान दर्ज किए हैं।

इस मामले में अब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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