वाशिंगटन, 18 अगस्त अमेरिका के एक प्रभावशाली सीनेटर ने कहा है कि अफगानिस्तान में मौजूदा स्थिति के अहम कारणों में से एक यह है कि अमेरिका के पास पाकिस्तान के दोहरे रुख से निपटने के लिए कोई प्रभावी नीति नहीं रही।
पाकिस्तान पर तालिबान बागियों की मदद करने का आरोप है जिसके नतीजे में 20 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद पूरे अफगानिस्तान पर उसका कब्जा हो गया।
युद्धग्रस्त मुल्क में उभरते मानवीय संकट पर गहरी चिंता जताते हुए सीनेट की शक्तिशाली सशस्त्र सेवा समिति के प्रमुख सीनेटर जैक रीड ने मंगलवार को कहा, “ हम यहां कैसे पहुंचे, इसका कोई आसान जवाब नहीं है। मैं कहना चाहूंगा कि अफगानिस्तान की 20 साल की जंग में कई कारक हुए जिसका यह नतीजा है और उनपर हमें विचार करना चाहिए तथा आगे बढ़ना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि इन कारकों में इराक में युद्ध में शामिल होना, पाकिस्तान के दोहरे रुख से निपटने के लिए कोई प्रभावी नीति नहीं होना, आतंकवाद रोधी मोर्चे पर नाकामी, अफगानिस्तान में प्रभावी सरकार बनाने और मजबूत सुरक्षा बलों को खड़ा करने में नाकामी शामिल है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर ने कहा कि इन सब नाकामियों में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किया गया दोहा समझौता भी जुड़ गया जिसमें अमेरिका को बहुत थोड़ी जीत मिली।
अफगानिस्तान में लंबे वक्त तक चली लड़ाई रविवार को तब अहम मोड़ पर पहुंच गई जब तालिबान के लड़ाकों ने काबुल को घेर लिया और फिर शहर में घुस कर राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया।
रीड ने कहा कि अफगान संकट डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी की समस्या नहीं है। उनके मुताबिक, यह दोनों पार्टियों के चार राष्ट्रपतियों के शासनकाल की विफलताएं हैं।
उन्होंने कहा कि सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति इस बात पर सुनवाई करेगी कि अफगानिस्तान में क्या गलत हुआ और उससे क्या सबक सीखे गए ताकि आगे उन गलियों को दोहराने से बचा जा सके।
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