नयी दिल्ली, 18 दिसंबर विदेश मंत्रालय की एक राजपत्र अधिसूचना के जरिये दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (एसएयू) के रजिस्ट्रार को गलत तरीके से आयकर छूट का विशेषाधिकार दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को 90 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। एक संसदीय समिति ने यह जानकारी दी है।
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी की अध्यक्षता वाली लोक लेखा समिति (पीएसी) ने सोमवार को लोकसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि विदेश मंत्रालय को पहली बार त्रुटि के बारे में 2011 में पता चला, जब उससे विश्वविद्यालय के प्रथम रजिस्ट्रार के लिए राजनयिक पहचान पत्र और कर छूट प्रमाण-पत्र के लिए संपर्क किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति यह जानकर हैरान है कि सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा अधिसूचना की समीक्षा के बावजूद यह त्रुटि जारी रही। मंत्रालय की ओर से राजपत्र अधिसूचना जारी करने में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए और उसे मजबूत किया जाना चाहिए.. खासकर, विदेश मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचनाओं के लिए, क्योंकि इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव होते हैं।''
समिति ने राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से प्रकाशित किए जाने वाले प्रावधानों से संबंधित सभी पहलुओं की जांच के लिए एक ‘‘प्रक्रियात्मक मानक प्रकोष्ठ’’ बनाने की सिफारिश की है, ताकि भविष्य में इस तरह की गलतियों को रोका जा सके।
समिति ने कहा कि विदेश मंत्रालय का यह कहना कि राजपत्र अधिसूचना में विसंगति एक वास्तविक त्रुटि थी, जो मुद्रण के समय हुई थी और मंत्रालय के किसी भी अधिकारी की ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं है, न तो ठोस आधार है और न ही मिलीभगत की संभावना को पूरी तरह से खारिज करने के लिए पर्याप्त है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति चाहती है कि मंत्रालय इस मामले की विस्तार से जांच करे और इस चूक के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए।’’
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