ताजा खबरें | श्रम संहिता लीड गंगवार दो अंतिम लोस

उन्होंने कहा कि दशकों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के लिए समग्र कानून आया है जिसका आधार ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ है।

उन्होंने कहा कि श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम संशोधन से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और ईपेपर में काम करने वाले लोगों के हितों की भी रक्षा हो सकेगी।

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जदयू सांसद दिनेश्वर कामत ने कहा कि इन संहिताओं से श्रमिकों के जीवन में व्यापक बदलाव आएगा और उनके लिए कामकाज की बेहतर स्थितियां पैदा होंगी।

उन्होंने कहा कि इसमें महिला श्रमिकों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

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चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू नहीं किया जाता जिससे आम लोगों और मजदूरों को फायदा नहीं मिल पा रहा है।

घोष ने कहा कि इन संहिताओं में फैक्ट्री चलाने वालों, श्रमिकों दोनों का हित है तथा इनसे देश के विकास में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि इन संशोधनों के बाद श्रमिकों में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा जिससे उद्योग क्षेत्र में काफी सुधार होगा।

तेलुगू देसम पार्टी (तेदेपा) के जयदेव गल्ला ने कहा कि संहिताओं में जो संशोधन किए गए हैं, उनका क्रियान्वयन सभी क्षेत्रों में लागू होना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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