नयी दिल्ली, 27 जून खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने शनिवार को वाराणसी में चार गांवों के 80 परिवारों को विद्युत चाक (मिट्टी के बर्तन बनाने वाली चक्की) का वितरण किया, जिसका उद्देश्य व्यथित प्रवासी श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर नौकरियां सृजित करना है।
केवीआईसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में कुम्हार समुदाय इस त्योहारी सत्र में "केवल स्वदेशी" उत्पादों के साथ देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
यह भी पढ़े | कोरोना का कहर: घर हो या ऑफिस, COVID-19 से बचना है तो क्रॉस वेंटिलेशन जरूरी.
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) वाराणसी में मिट्टी के दीये, देवताओं की मूर्तियां और अन्य मिट्टी के बर्तनों के निर्माण के लिए कुम्हारों को प्रशिक्षण दे रहा है।
केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने इटहराडीह, अहरौराडीह, अर्जुनपुर और चक साहजांगीगंज के चार गांवों से जुड़े 80 कुम्हार परिवारों को बिजली के चाकों का वितरण किया।
यह भी पढ़े | दुनियाभर में कोरोना वायरस का कहर, कोविड-19 के मामले 94 लाख के पार.
इन सभी गाँव में लगभग 150 से 200 कुम्हार परिवार रहते हैं जो कई पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तनों को बनाने में लगे हुए हैं। केवीआईसी ने अगले तीन महीनों में वाराणसी में 1,500 कुम्हार चाक का वितरण ककरने का लक्ष्य रखा है।
यह अनुमान है कि अकेले वाराणसी में प्रवासियों मजदूरों के लिए लगभग 1,200 नौकरियां सृजित होंगी। इस प्रयास का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर नौकरियों सृजित करना है। केवीआईसी ने कहा कि संकटग्रस्त प्रवासी कामगारों को आजीविका की तलाश में दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं है।
इस अवसर पर उपस्थित कुम्हार सशक्तिकरण योजना के लाभार्थियों ने वीडियो-सम्मेलन के माध्यम से केवीआईसी के अध्यक्ष से बात की।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY