देश की खबरें | कोविड-19 ने किसी एक स्रोत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की निर्भरता के जोखिम को उजागर किया : मोदी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 28 सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन के साथ डिजिटल द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने किसी एक स्रोत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अति निर्भरता से जुड़े जोखिम को उजागर किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ काम कर रहा है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लायी जा सके। उन्होंने कहा कि इस पहल में शामिल होने के लिए समान विचारधारा वाले देशों का स्वागत है।

यह भी पढ़े | IPL2020: मुंबई इंडियंस ने जीता टॉस, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को पहले बल्लेबाजी का न्योता: 28 सितंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

मोदी ने शिखर सम्मेलन में अपने शुरुआती संबोधन में यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने देशों के लिए आवश्यक बना दिया कि वे मिल कर काम करने के लिए पारदर्शिता, लोकतांत्रिक मूल्य प्रणाली और नियमों पर आधारित आदेश पर भरोसा करें।

प्रधानमंत्री ने किसी भी देश या स्रोत का नाम लिए बिना कहा, ‘‘महामारी ने किसी एक स्रोत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिम को उजागर कर दिया है।’’

यह भी पढ़े | Facebook आईडी का अगर भूल गए हैं पासवर्ड तो चिंता की कोई बात नहीं, ऐसे करें Password को रिसेट .

मोदी ने सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के साथ ही कृषि, कराधान और श्रम बाजार जैसे क्षेत्रों के विभिन्न सुधार उपायों को भी रेखांकित किया।

मोदी ने कहा, ‘‘ हम (आत्मनिर्भर भारत) पहल के तहत चौतरफा सुधारों पर ध्यान दे रहे रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारत में काम करने वाली कंपनियों को विनियामक और कराधान सुधारों से लाभ होगा।

डेनमार्क उत्तरी यूरोप का एक प्रमुख देश है जिसके साथ पिछले कुछ वर्षों में भारत के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत और डेनमार्क के बीच 2016 से 2019 के बीच वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार में 30.49 प्रतिशत की वृद्धि हुयी तथा व्यापार का आकार 2.82 अरब डॉलर से बढ़कर 3.68 अरब डॉलर हो गया।

डेनमार्क की करीब 200 कंपनियों ने भारत में जहाजरानी, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निवेश किया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार डेनमार्क की प्रमुख कंपनियों में करीब 5,000 भारतीय पेशेवर काम कर रहे हैं वहीं 20 भारतीय आईटी कंपनियां दशकों से डेनमार्क में काम कर रही हैं।

ग्रंडफोस, डैनफॉस, वेस्टास, एलएम विंड, नोवोजीम्स, रॉकवूल, हल्डोर टोपसो जैसी प्रमुख डेनिश कंपनियों ने 'मेक इन इंडिया' योजना के तहत भारत में कारखानों और विनिर्माण इकाइयों की स्थापना की है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)