देश की खबरें | कोविड-19: उपचार शुल्क की सीमा तय करने के खिलाफ दायर याचिका पर अदालत का विचार करने से इनकार

नयी दिल्ली, तीन जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें अस्पतालों में कोविड-19 के उपचार शुल्क की सीमा तय किए जाने के दिल्ली सरकार के निर्णय की समीक्षा करने का आग्रह किया गया था।

अदालत ने निर्देश दिया कि इस याचिका को अभिवेदन के रूप में माना जाना चाहिए।

यह भी पढ़े | पाकिस्तान में सिख तीर्थयात्रियों के निधन से दुखी हूं: PM नरेंद्र मोदी : 3 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह अभिवेदन पर कानून, नियमों और मामले के तथ्यों के संबंध में लागू सरकारी नीति के अनुरूप जल्द से जल्द और व्यावहारिक ढंग से निर्णय करे।

पीठ ने निर्देश जारी करने के साथ ही एसकेएम फाउंडेशन द्वारा दायर इस याचिका का निपटारा कर दिया।

यह भी पढ़े | पीएम मोदी ने गलवान घाटी में घायल हुए सैनिकों से लेह के अस्पताल में की मुलाकात, बोले, 'दुनिया के किसी भी ताकत के सामने न कभी झुके हैं न कभी झुकेंगे'.

याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 उपचार शुल्क की सीमा तय करने संबंधी दिल्ली सरकार के 20 जून के आदेश ने ‘‘संचालनात्मक खामियां’’ बढ़ा दी हैं जिससे सभी को उचित गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने का उद्देश्य विफल हो जाता है।

पीठ ने यह भी कहा कि किसी भी अस्पताल ने आकर यह दावा नहीं किया है कि सरकार द्वारा तय शुल्क पर उपचार उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है, ऐसे में याचिकाकर्ता यह अनुमान नहीं लगा सकता कि तय की गई राशि अनुचित है।

अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि उसे अदालत आने से पहले यह देखना चाहिए कि स्थापित प्रणाली काम कर रही है या नहीं।

पीठ ने यह भी कहा कि यदि कभी कोई व्यक्ति दिल्ली सरकार के आदेश को चुनौती देगा तो इसपर कानून के अनुरूप उचित मंच द्वारा निर्णय किया जाएगा।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)