नयी दिल्ली, 22 दिसंबर केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को 27 दिन हो गये हैं और इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रदर्शनकारी किसान संगठन जल्द अपनी आंतरिक चर्चा पूरी करेंगे और संकट के समाधान के लिए सरकार के साथ पुन: वार्ता शुरू करेंगे।
तोमर ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के दो और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की, जिन्होंने कानूनों के प्रति अपना समर्थन जताया है।
कृषि मंत्री ने दोनों समूहों से मुलाकात के बाद कहा, ‘‘विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि यह बताने आये थे कि कानून अच्छे हैं और किसानों के हित में हैं। वे सरकार से यह अनुरोध करने आये थे कि कानूनों में कोई संशोधन नहीं किया जाए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि वे (प्रदर्शनकारी किसान संघ) जल्द अपनी आंतरिक वार्ता पूरी करेंगे और सरकार के साथ बातचीत के लिए आगे आएंगे। हम सफलतापूर्वक समाधान निकाल सकेंगे।’’
कृषि मंत्रालय ने रविवार को प्रदर्शनकारी समूहों को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया था कि सरकार के प्रस्तावों पर अपनी चिंताएं स्पष्ट करें तथा प्रदर्शन को समाप्त करने के लिहाज से वार्ता के अगले चरण के लिए तारीख तय करें।
दोनों पक्षों के बीच हुई कम से कम पांच दौर की औपचारिक वार्ता बेनतीजा रही है और आंदोलनकारी किसान तीनों कानूनों को निरस्त करने से कम किसी चीज पर राजी नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश की किसान संघर्ष समिति (केएसएस) और दिल्ली का इंडियन किसान यूनियन (आईकेयू) उन किसान संगठनों में शामिल है, जिन्होंने पिछले तीन सप्ताह में नये कृषि कानूनों के प्रति समर्थन जताया है। इससे पहले हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ संगठन सरकार का समर्थन कर चुके हैं।
हालांकि, करीब 40 समूह दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और 27 दिन से वहां डेरा डाले हैं।
मंगलवार को हुई बैठक में राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र सिंह नागर और उत्तराखंड के पूर्व मंत्री तथा आईकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकुमार वालिया भी उपस्थित थे।
केएसएस के अध्यक्ष अजय पाल प्रधान ने बैठक के बाद ‘पीटीआई ’ से कहा, ‘‘केंद्र द्वारा लागू किये गये तीनों कानून अच्छे हैं और किसान समुदाय के हित में हैं।’’
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