देश की खबरें | केरल उच्च न्यायालय ने हत्या के प्रयास मामले में फैजल की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित किया

कोच्चि, 25 जनवरी केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को लक्षद्वीप के पूर्व सांसद मोहम्मद फैजल की दोषसिद्धि को यह कहते हुए निलंबित कर दिया कि ऐसा नहीं करने पर उनकी रिक्त सीट के लिए फिर से चुनाव होंगे जिससे सरकार और जनता पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अभियुक्त फैजल की दोषसिद्धि को निलंबित नहीं करने का नतीजा ‘‘न केवल उनके (फैजल) बल्कि राष्ट्र के लिए भी कठोर होगा।’’

न्यायालय ने कहा कि राजनीति में शुचिता जरूरी है और राजनीति से अपराधीकरण को खत्म करना हर लोकतंत्र की अनिवार्य आवश्यकता है। न्यायालय ने कहा, ‘‘सामाजिक हित तथा राजनीति और चुनाव में शुचिता की आवश्यकता में संतुलन बैठाना होगा।’’

लक्षद्वीप की एक अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में 11 जनवरी को फैजल समेत चार लोगों को 10 साल कैद की सजा सुनाई थी।

लोकसभा सचिवालय द्वारा 13 जनवरी को जारी एक अधिसूचना के अनुसार फैजल 11 जनवरी से लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराये गये थे।

उच्च न्यायालय के फैसले से लक्षद्वीप लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्धारित उपचुनाव प्रभावित होने की संभावना है।

न्यायालय ने कहा कि संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अगले आम चुनाव वर्ष 2024 में होने वाले हैं और यदि लक्षद्वीप के निर्वाचन क्षेत्र के लिए चुनाव फैजल की दोषसिद्धि और उन्हें अयोग्य ठहराये जाने के कारण तुरंत होने है तो इससे ‘‘सरकार और जनता पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।’’

न्यायालय ने कहा कि चुनाव के लिए भारी खर्च करने के बाद भी, निर्वाचित उम्मीदवार का कार्यकाल केवल 15 महीने से कम की अवधि का होगा।

लक्षद्वीप प्रशासन की ओर से पक्ष रख रहे भारत के उप सॉलिसिटर जनरल (डीएसजीआई) मनु एस ने उच्च न्यायालय के आदेश की पुष्टि की। यह आदेश लक्षद्वीप की सत्र अदालत द्वारा सुनाई गयी सजा के खिलाफ फैजल और तीन अन्य की संयुक्त याचिका पर आया है।

केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप ने दोषियों को सुनाई गयी सजा को निलंबित करने का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें राहत देने से न्यायिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास डिगेगा।

उसने यह भी कहा कि फैजल और उनके भाई ने जो अपराध किया है, उसने इस द्वीपीय क्षेत्र के समाज को स्तब्ध कर दिया है जहां बहुत कम अपराध होते हैं। फैजल के भाई एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे।

लक्षद्वीप प्रशासन ने कहा था कि इनकी रिहाई से समाज में गलत संदेश जाएगा।

मामले में 37 आरोपी थे। इनमें से दो की मौत हो गयी और उनके खिलाफ मुकदमा बंद कर दिया गया था। शेष 35 आरोपियों में से पूर्व सांसद और उनके भाई समेत चार लोगों को दोषी करार दिया गया तथा 10 साल के कारावास की सजा सुनाई गयी, वहीं बाकी को बरी कर दिया गया था।

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