तिरुवनंतपुरम, 15 नवंबर केरल सरकार ने स्थानीय निकायों के लिए वित्त आयोग द्वारा स्वीकृत अनुदान के वितरण पर केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई नई शर्त को बुधवार को ‘असंवैधानिक’ करार दिया। इससे वाम सरकार और भाजपा नीत केंद्र सरकार के बीच टकराव बढ़ सकता है।
केरल के स्थानीय स्वशासन मंत्री एमबी राजेश ने आरोप लगाया, “ केंद्र सरकार ने अंतिम समय में और वित्त आयोग की अनुशंसा के बिना एक विशेष आदेश के जरिए एक शर्त लगा दी। यह कदम देश में पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने का एक असंवैधानिक प्रयास है।”
उन्होंने दावा किया कि विवादित प्रावधान में राज्यों में स्थानीय निकायों के लिए प्रारंभिक अनुदान किस्त को रोकना शामिल है। उन्होंने कहा कि यह विवाद का मुद्दा है।
राजेश के अनुसार, यह प्रावधान पहली किस्त को प्रभावित करेगा जो 15वें वित्त आयोग से राज्य को आवंटित कुल अनुदान का आधा हिस्सा है।
चौदहवें वित्त आयोग अनुदान के तहत, केरल को पांच वर्षों (2015-16 से 2019-20) में 7012.01 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें कुल व्यय 5484.84 करोड़ रुपये (78.22 प्रतिशत) था।
केंद्र सरकार द्वारा केरल पर कथित वित्तीय प्रतिबंधों को लेकर राज्य और केंद्र के बीच मौजूदा विवाद में यह टकराव का एक अन्य मुद्दा है।
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