देश की खबरें | केरल की अदालत ने ‘घृणा भाषण’ के मामले में जॉर्ज को अग्रिम जमानत देने से इंकार किया

कोच्चि, 21 मई यहां की सत्र अदालत ने वरिष्ठ नेता पीसी जॉर्ज की ओर से ‘‘घृणा भाषण’’ मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका शनिवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उनकी टिप्पणी की प्रकृति प्रथम दृष्टया समुदायों में द्वेष, घृणा और दुराव पैदा करने वाली लगती है।

जॉर्ज की जमानत अर्जी पर अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के कुछ देर बाद ही पुलिस पूर्व विधायक के आवास पर उन्हें हिरासत लेने के लिए पहुंची। लेकिन वह वहां पर नहीं मिले।

जॉर्ज ने एर्णाकुलम जिले के वेन्नला स्थित मंदिर में उत्सव के दौरान दिए गए अपने भाषण में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस संबंध में कोच्चि शहर पुलिस ने 10 मई को जॉर्ज के खिलाफ प्रथमिकी दर्ज की थी, जिसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया।

अदालत ने कहा कि जॉर्ज की अग्रिम जमानत पर नरम रुख अपनाना संभव नहीं है और इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (जॉर्ज) की ओर की गई टिप्पणी... प्रथमदृष्टया ऐसी प्रकृति की लगती है कि वह मुस्लिम समुदाय के लोगों और हमारे राज्य में दो अन्य प्रमुख धर्मों के अनुयायियों के बीच विद्वेष, घृणा और मनमुटाव पैदा कर सकती है।’’

अदालत ने कहा कि हाल में इसी तरह के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किए गए जॉर्ज को इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वह विवादित बयान नहीं देंगे जिससे अन्य लोगों की धार्मिक भावना आहत हो।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी गिरीष ने रेखांकित किया कि जॉर्ज ने तिरुवनंतपुरम में दर्ज इसी तरह के मामले में मिली जमानत के 10 दिनों के भीतर मौजूदा बयान दिया।

पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-153 (विभिन्न समूहों में वैमनस्य को बढ़ावा देना) और धारा-295ए (किसी समूह की धार्मिक भावनाओं को भड़काने व किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने का कृत्य) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) जब सत्ता में था तब जॉर्ज मुख्य सचेतक थे। उन्होंने कथित तौर पर यह कहकर विवाद पैदा कर दिया गया कि केरल के गैर मुस्लिमों को समुदाय द्वारा संचालित रेस्तरां से बचना चाहिए।

पिछले महीने आयोजित अनंतपुरी हिंदू महा सम्मेलन को संबोधित करते हुए केरल कांग्रेस के नेता ने आरोप लगाया था कि मुस्लिमों द्वारा संचालित रेस्तरां में कथित तौर पर ‘‘नपुंसक बनाने वाली दवा मिलाकर’’चाय बेची जाती है ताकि लोगों को ‘नपुंसक’ बनाया जा सके और देश पर ‘नियंत्रण स्थापित’ किया जा सके।

इस टिप्पणी को राजनीतिक विवाद हुआ था और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्हें एक मई को मामले में गिरफ्तार भी किया गया था लेकिन उसी दिन तिरुवंनतपुरम की अदालत से जमानत मिल गई।

उल्लेखनीय है कि जॉर्ज पिछले 33 साल से पूंजार विधानसभा सीट से विधायक थे लेकिन वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें इस सीट से वाम दल के प्रत्याशी से हार मिली थी।

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