तिरुवनंतपुरम, 15 जुलाई केरल विधानसभा की कार्यवाही सत्तारूढ़ माकपा विधायक एम एम मणि की विवादित टिप्पणियों को लेकर विपक्षी दल यूडीएफ के हंगामे के बाद शुक्रवार को दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी।
मणि ने आरएमपी विधायक के. के. रीमा के बारे में कथित तौर पर कहा था कि विधवा होना उनकी किस्मत में लिखा था।
प्रश्नकाल शुरू होने पर कांग्रेस नीत यूडीएफ सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि मणि ने स्त्री जाति का अपमान किया है और उन्हें अपना बयान वापस लेना चाहिए तथा सदन में माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं जिन पर लिखा था, ‘‘स्त्री जाति का अपमान करने वाले एम एम मणि को इस्तीफा देना चाहिए।’’
बहरहाल, विधि मंत्री पी. राजीव ने कहा कि मणि के कहने का मतलब था कि रीमा के पति टी पी चंद्रशेखरन की हत्या में सत्तारूढ़ माकपा की कोई भूमिका नहीं है।
विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि मणि का बयान ‘‘महिला विरोधी’’ है और यह देखकर हैरत हुई कि मुख्यमंत्री समेत सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने उनका बचाव किया है।
जब विधानसभा अध्यक्ष एम बी राजेश ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की तो विपक्षी सदस्य लगातार हंगामा करते रहे, जिसके कारण उन्हें सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
बाद में यूडीएफ सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया और विधानसभा परिसर से बाहर जाने से पहले सभागार में धरना दिया।
रीमा के पति, माकपा के बागी नेता टी पी चंद्रशेखरन की मई 2012 में उस समय हत्या कर दी गयी थी जब उन्होंने उत्तरी केरल में अपने गृहनगर ओन्चियाम में, एक समानांतर वाम दल ‘‘रेवोल्यूशनरी मार्क्सवादी पार्टी’’ (आरएमपी) का गठन किया था।
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