बगलकोट(कर्नाटक), दो सितंबर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार कावेरी नदी का जल तमिलनाडु को छोड़े जाने के मुद्दे पर कोवरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और उच्चतम न्यायालय के समक्ष जमीनी हकीकत बयां करेगी।
मुख्यमंत्री ने कम बारिश होने के चलते कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्र में सूखे की स्थिति रहने को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मिलने का समय मांगा है।
सिद्धरमैया ने कहा कि वह मंजूरी का इंतजार कर रहे अन्य लंबित परियोजनाओं के साथ-साथ इस मुद्दे पर राज्य के हित का संरक्षण करने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘(दूसरे राज्य को देने के लिए) हमारे पास जल नहीं है, इसके बावजूद कावेरी जल नियमन समिति ने कहा है कि हमें प्रतिदिन (तमिलनाडु को) 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ना है। पहले उन्होंने 15,000 क्यूसेक कहा था, जिसके बाद हमारे आग्रह करने पर उन्होंने इसे घटा कर 10,000 क्यूसेक कर दिया, अब हमारी अपील के बाद वे मिले और कहा कि 5,000 क्यूसेक जारी किया जाना चाहिए।’’
सिद्धरमैया ने यहां संवाददाताओं से कहा कि तमिलनाडु ने 24,000 क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में एक अपील की है।
उन्होंने कहा, ‘‘कहां से हम इतनी मात्रा में पानी छोड़ेंगे? हमें फसलों को बचाना है, पेयजल उपलब्ध करना है। हम अपनी पेयजल जरूरतों और हमारे किसानों की फसलों को बचा कर राज्य के हित की सुरक्षा करेंगे। हम जमीनी तथ्यों को कोवरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और उच्चतम न्यायालय के समक्ष रखेंगे।’’
प्राधिकरण ने कर्नाटक को 29 अगस्त से अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। इसने कोवरी जल नियमन समिति की सिफारिश के आधार पर यह फैसला लिया है।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘हमारे जल संसाधन मंत्री (डी के शिवकुमार) ने राज्य की कानूनी टीम से मुलाकात की और उसे जमीनी हकीकत से अवगत कराया है। साथ ही, उसे इस बारे में आवश्यक निर्देश दिये कि राज्य की दलील में क्या आधार होना चाहिए क्योंकि मामला (तमिलनाडु के उल्लेख करने पर उच्चतम न्यायालय के समक्ष) बुधवार को आ रहा है।’’
तमिलनाडु को पानी छोड़ने के कर्नाटक सरकार के कदम के खिलाफ कावेरी नदी के आसपास के क्षेत्रों में स्थित मैसुरु, मांडया और चामराजनगर के कई किसान संगठनों ने प्रदर्शन किये हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने कर्नाटक के हितों की सुरक्षा नहीं करने के लिए राज्य की कांग्रेस सरकार की आलोचना की है।
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