ताजा खबरें | कश्मीर विधेयक चर्चा तीन अंतिम लोस

उन्होंने कहा कि अभी डेढ़ साल हुआ है जिसमें एक वर्ष कोरोना वायरस महामारी में निकल गया।

उन्होंने कहा कि प्रतीक्षा कीजिए आगे विकास के फैसले होते रहेंगे।

आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि गृह मंत्री ने कहा था कि कानून व्यवस्था की स्थिति बहाल होने और सामान्य स्थिति होने के बाद जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन ऐसा कब होगा।

उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि सरकार वहां सामान्य स्थिति नहीं कर सकी है, इसलिए पूर्ण राज्य का दर्जा अभी तक नहीं बहाल किया गया है।

प्रेमचंद्रन ने कहा कि जम्मू कश्मीर में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल की जानी चाहिए और वहां जमीनी हालात का आकलन करने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को भेजा जाना चाहिए।

भाजपा के जे टी नामज्ञाल ने कहा कि इस विधेयक के प्रभाव में आने के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख में अधिकारियों की कार्य क्षमता बढ़ेगी, लोगों को अच्छे माहौल में काम करने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इससे दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में प्रशासनिक एकरूपता आएगी।

नामज्ञाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे ‘दिशाहीन’ पार्टी करार दिया और कहा कि जम्मू कश्मीर के अलग तरह का राज्य होने की मानसिकता बदलनी है। दोनों केंद्रशासित प्रदेश भारत का अटूट अंग हैं और सभी के समान हैं।

उन्होंने मांग की कि लद्दाख के लिए अलग राज्य लोक सेवा आयोग गठित किया जाना चाहिए।

कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि इस विधेयक की राजनीतिक मंशा जम्मू कश्मीर का विभाजन किये जाने के बाद उसे स्थायित्व प्रदान करने की है।

उन्होंने कहा कि जब मूल विधेयक लाया गया था तो कहा गया था कि जम्मू कश्मीर में अमन आएगा, विकास आएगा, लेकिन पिछले 17 महीनों में इसके विपरीत हुआ है।

तिवारी ने दावा किया कि कश्मीर में इस अवधि में कोई नया उद्योग नहीं आया, वहीं जम्मू में कई उद्यम बंद हो गये।

उन्होंने भी कुछ अन्य विपक्षी सदस्यों की तरह कहा कि जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया गया था। 17 महीने हो गये, लेकिन एक तरफ तो यह दर्जा बहाल नहीं किया गया, वहीं प्रशासनिक कैडर को दूसरे कैडर में मिलाया जा रहा है। आखिर सरकार की मंशा और नीयत क्या है।

तिवारी ने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून को शीर्ष अदालत में संवैधानिक चुनौती दी गयी है और नैतिकता का तकाजा कहता है कि इसके बाद के क्रम में कोई विधेयक नहीं लाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विधेयक की संवैधानिकता पर फैसला जब तक नहीं हो जाताा, तब तक मौजूदा विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए।

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर बदल रहा है और वहां के लोग नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीडीपी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि वहां जिला विकास परिषद के सफल चुनाव दर्शाते हैं कि लोग विकास के साथ हैं।

एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि अनुच्छेद 370 को असंवैधानिक तरीके से खत्म किया गया।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने सदन में कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे को जल्द बहाल किया जाएगा, लेकिन इस विधेयक से साफ है कि वह इसे पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं देने जा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि उनकी बात सिर्फ एक जुमला साबित हुई है।

ओवैसी ने सवाल किया कि क्या सरकार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेगी?

उन्होंने कहा कि सरकार को यूरोपीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की बजाय भारत के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर भेजना चाहिए।

ओवैसी ने दावा किया कि सरकार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण कर रही है।

कांग्रेस के जसबीर सिंह गिल ने कहा कि इस विधेयक से जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक दिक्कतें पैदा होंगी और इस कदम का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पंजाबी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक घोषित किया जाए।

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