कश्मीर स्थित फोटो पत्रकारों को पुलित्जर पुरस्कार के खिलाफ खुला-पत्र
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नयी दिल्ली, 10 मई कश्मीर स्थित दो फोटो पत्रकारों को पुरस्कार दिये जाने पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 100 से ज्यादा हस्तियों ने पुलित्जर बोर्ड को एक खुला पत्र लिखकर कहा कि जूरी उन्हें पुरस्कृत कर झूठ, तथ्यों की गलत व्याख्या और अलगाववाद की पत्रकारिता को बढ़ावा दे रही है।

चन्नी आनंद, मुख्तार खान और डार यासिन तीन भारतीय फोटो पत्रकार हैं जिन्हें कश्मीर पर उनकी फोटोग्राफी के लिये फीचर फोटोग्राफी श्रेणी में 2020 का पुलित्जर पुरस्कार दिया गया है।

पुलित्जर पुरस्कार 2020 के प्रशासक, बोर्ड और जूरी को लिखे खुले पत्र में उन्होंने खान और यासिन को दिये गए पुरस्कार पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि दोनों ने अपनी तस्वीरों के कैप्शन में “भारत के नियंत्रण वाला कश्मीर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

पुलित्जर पुरस्कार के स्वतंत्र पत्रकारिता के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए पत्र में कहा गया, “यह विडंबना है कि डार यासिन और मुख्तार खान जैसे फोटोग्राफरों को पुरस्कृत कर आप झूठ, तथ्यों की गलत व्याख्या और अलगाववाद की पत्रकारिता व फोटोग्राफी को बढ़ावा दे रहे हैं।”

इस खुले पत्र में कहा गया कि इसमें चन्नी आनंद का नाम शामिल नहीं किया गया क्योंकि उनकी तस्वीर भारत की छवि खराब नहीं करती और दो अन्य फोटो पत्रकारों की तरह उन्होंने ‘भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।

पत्र में “विवादास्पद कश्मीरी क्षेत्र” जैसे शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई गई है।

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