जरुरी जानकारी | कर्नाटक ने जीएसटी भरपाई के लिये केन्द्र के सुझाये विकल्पों में से पहले विकल्प को चुना

बेंगलूरू, दो सितंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार वाली कर्नाटक सरकार ने बुधवार को कहा कि उसने माल एवं सेवाकर (जीएसटी) राजस्व में कमी की भरपाई के लिये कर्ज लेने के बारे में केन्द्र द्वारा सुझाये गये दो विकल्पों में से पहले विकल्प को अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत राज्य सरकार कुल 18,289 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति पाने की पात्र होगी।

मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया। येदियुरप्पा के पास राज्य के वित्त विभाग का भी प्रभार है।

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मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘केन्द्र के दोनों विकल्पों का मूल्यांकन करने के बाद यह महसूस किया गया है कि पहला विकल्प राज्य के वित्त के लिये बेहतर होगाा।’’

इसलिये कर्नाटक सरकार ने पहले विकल्प को लेकर अपनी वरीयता के बारे में केन्द्र सरकार को अपने निर्णय से अवगत कराने का फैसला किया है।

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राज्य सरकार ने कहा है कि इससे चालू वित्त वर्ष के दौरान उसे अपने राजस्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने विज्ञप्ति में कहा है कि पहले विकल्प के तहत कर्नाटक को कुल मिलाकर 18,289 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति मिलेगी। इसमें से 6,965 करोड़ रुपये उपकर संग्रह से प्राप्त होंगे। शेष 11,324 करोड़ रुपये की राशि को एक विशेष खिड़की सुविधा के तहत उधार लिया जायेगा जिसके मूल और ब्याज की अदायगी भविष्य में जमा होने वाले क्षतिपूर्ति उपकर कोष से की जायेगी।

राज्य सरकार के मुताबिक इसके अलावा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का एक प्रतिशत (18,036 करोड़ रुपये) बिना शर्त अतिरिक्त उधारी भी उपलब्ध होगी और अन्य एक प्रतिशत कर्ज विभिन्न सुधारों के लिये लिया जा सकेगा। भारत सरकार ने इससे पहले इस बारे में सुझाव दिया था।

राज्य सरकार के मुताबिक केन्द्र के दूसरे विकल्प के तहत कर्नाटक कुल 25,508 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति के लिये पात्र होगा। इसमें से 6,965 करोड़ रुपये उपकर संग्रह से प्राप्त होंगी। शेष 18,543 करोड़ रुपये बाजार प्रतिभूति जारी करके जुटाये जा सकेंगे। बहरहाल, इस विकल्प में जीएसडीपी के एक प्रतिशत राशि (18,036 करोड़ रुपये) बिना किसी शर्त के अलग से उपलब्ध नहीं होगी। परिणामस्वरूप शुद्ध उधारी 10,817 करोड़ रुपये कम रह जायेगी। इसके साथ ही दूसरे विकल्प में बाजार पूतिभूति जारी करके जुटाई जाने वाली राशि पर ब्याज की अदायगी राज्य सरकार को अपने संसाधनों से करनी होगी।

केन्द्र सरकारने पिछले सप्ताह हुई जीएसटी परिषद की बैठक के बाद चालू वित्त वर्ष में 2.35 लाख करोड़ रुपये के संभावित जीएसटी कमी की भरपाई के लिये राज्यों को कर्ज लेने के बारे में दो विकल्प सुझाये थे। केन्द्र ने राज्यों से एक सप्ताह के भीतर अपनी राय उसे बताने को कहा था।

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