चेन्नई, पांच जुलाई तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी की पत्नी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के लिए बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सी वी कार्तिकेयन को चुना गया। इससे पहले एक खंडपीठ ने इस मामले में खंडित फैसला सुनाया था।
मामला बृहस्पतिवार को अपराह्न ढाई बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
मूल रूप से न्यायमूर्ति जे निशा बानू और न्यायमूर्ति डी भरत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने चार जुलाई को द्रमुक सरकार में मंत्री बालाजी की पत्नी एस मेगाला की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर खंडित फैसला सुनाया था।
मेगाला की याचिका में आरोप लगाया था कि उनके पति धनशोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय की अवैध हिरासत में हैं। उन्होंने अदालत से प्रार्थना की थी कि बालाजी को अदालत में पेश किया जाए और अदालत उन्हें जाने दे।
न्यायमूर्ति निशा बानू ने बालाजी (47) की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर ली, जबकि न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने इसे खारिज कर दिया।
याचिका स्वीकार किये जाने योग्य होने का उल्लेख करते हुए न्यायमूर्ति बानू ने पुलिस को बालाजी को छूट देने का निर्देश दिया क्योंकि वह बगैर विभाग वाले मंत्री हैं।
इससे असहमति जताते हुए न्यायमूर्ति चक्रवती ने अपने आदेश में चार सवाल रखे और उनके जवाब दिये।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ‘रुपये के बदले नौकरी देने’ से जुड़े प्रकरण में बालाजी को धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत पिछले महीने गिरफ्तार किया था।
खंडित फैसला आने के कारण खंडपीठ ने रजिस्ट्री को विषय को एक तीसरे न्यायाधीश के पास भेजने के लिए इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया था।
तदनुसार मुख्य न्यायाधीश एस वी गंगापुरवाला ने बुधवार को न्यायमूर्ति सी वी कार्तिकेयन को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के लिए तीसरे न्यायाधीश के रूप में नामित किया।
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